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पश्चिम बंगाल: अमित शाह का ममता पर हमला, बोले- सिंडिकेट को बचाने के लिए नए आपराधिक कानूनों को नहीं किया लागू
Fri, 21 Aug 2026 05:44 PM IST
राहुल कुमार
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 21 Aug 2026 05:44 PM IST
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
- फोटो : पीटीआई
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने संसद से पारित नए आपराधिक कानूनों को इसलिए अधिसूचित नहीं किया, क्योंकि वह सिंडिकेट, कट-मनी और वसूली के राज को बचाना चाहती थीं।
सिलीगुड़ी के कावाखाली मैदान में शुक्रवार को तीन नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए शाह ने कहा कि अब सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इन कानूनों को लागू किया है। उन्होंने दावा किया कि इन कानूनों ने राज्य में भय के माहौल को भरोसे में बदलने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है।
'ममता ने नए कानूनों को अधिसूचित नहीं किया'
अमित शाह ने कहा, जब पूरा देश नए आपराधिक कानूनों को लागू करना शुरू कर चुका था, तब ममता बनर्जी ने इन्हें अधिसूचित नहीं किया। उन्हें पता था कि ये कानून उनके सिंडिकेट, कट-मनी और वसूली के राज के लिए मौत की घंटी साबित होंगे। गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने राज्य में कानून का शासन स्थापित किया है। नए आपराधिक कानूनों से न्याय देने की प्रक्रिया तेज होगी और किसी भी पुलिस थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कराई जा सकेगी।
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घुसपैठियों को लेकर भी दोहराया रुख
सीमा पार से घुसपैठ के मुद्दे पर शाह ने अपना रुख दोहराते हुए कहा, मैं इस राज्य में एक-एक घुसपैठिये का पता लगाने और ‘डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट’ तंत्र के जरिए उन्हें देश से बाहर निकालने के अपने दृढ़ संकल्प को दोहराता हूं। उन्होंने कहा कि बनर्जी ने बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के लागू होने को रोकने की कोशिश की थी और इसका मजाक भी उड़ाया था। शाह ने कहा, “लेकिन अब लोगों ने उन्हें और उनकी सरकार को सत्ता से हटा दिया है।
1 जुलाई 2024 से लागू हुए नए कानून
तीन नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) एक जुलाई 2024 से लागू हुए। इन कानूनों ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है।
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सिलीगुड़ी के कावाखाली मैदान में शुक्रवार को तीन नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए शाह ने कहा कि अब सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इन कानूनों को लागू किया है। उन्होंने दावा किया कि इन कानूनों ने राज्य में भय के माहौल को भरोसे में बदलने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है।
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'ममता ने नए कानूनों को अधिसूचित नहीं किया'
अमित शाह ने कहा, जब पूरा देश नए आपराधिक कानूनों को लागू करना शुरू कर चुका था, तब ममता बनर्जी ने इन्हें अधिसूचित नहीं किया। उन्हें पता था कि ये कानून उनके सिंडिकेट, कट-मनी और वसूली के राज के लिए मौत की घंटी साबित होंगे। गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने राज्य में कानून का शासन स्थापित किया है। नए आपराधिक कानूनों से न्याय देने की प्रक्रिया तेज होगी और किसी भी पुलिस थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कराई जा सकेगी।
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घुसपैठियों को लेकर भी दोहराया रुख
सीमा पार से घुसपैठ के मुद्दे पर शाह ने अपना रुख दोहराते हुए कहा, मैं इस राज्य में एक-एक घुसपैठिये का पता लगाने और ‘डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट’ तंत्र के जरिए उन्हें देश से बाहर निकालने के अपने दृढ़ संकल्प को दोहराता हूं। उन्होंने कहा कि बनर्जी ने बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के लागू होने को रोकने की कोशिश की थी और इसका मजाक भी उड़ाया था। शाह ने कहा, “लेकिन अब लोगों ने उन्हें और उनकी सरकार को सत्ता से हटा दिया है।
1 जुलाई 2024 से लागू हुए नए कानून
तीन नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) एक जुलाई 2024 से लागू हुए। इन कानूनों ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है।