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लोग क्या कहेंगे... मीम बन गया तो?: गोरखपुर में मीम और बुलिंग के डर से सहमी GenZ,मन में दफन कर रहे टेंशन
Sun, 23 Aug 2026 02:55 PM IST
Rohit Singh
निखिल तिवारी, गोरखपुर
निखिल तिवारी, गोरखपुर
Published by: Rohit Singh
Updated Sun, 23 Aug 2026 02:55 PM IST
जिला अस्पताल की मनोरोग विभाग की ओपीडी 80-100 मरीजों की है। हर दिन दो से तीन युवा मन में डर लिए आते हैं। बीआरडी में मनोरोग विभाग की ओपीडी 150 मरीजों की है। यहां प्रतिदिन चार से पांच युवा मन में डर लेकर आ रहे हैं। शहर के अन्य मनोवैज्ञानिकों के पास भी ऐसे युवा पहुंच रहे हैं जो शुरुआत में अपनी समस्या स्वीकार करने से ही बचते हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का बढ़ता खतरा
- फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
एक तरफ जेनजी अपने मुद्दों और अधिकारों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक आवाज उठा रहा है। दूसरी तरफ मीम और बुलिंग का डर उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रहा है। यह डर जेनजी की मानसिक सेहत पर असर डाल रहा है।
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युवा अपनी निजी समस्याएं परिवार, दोस्तों या किसी विशेषज्ञ से साझा करने में भी झिझक रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर उनकी परेशानी किसी को पता चली तो उसका मजाक बनाया जा सकता है या मीम बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया जा सकता है। इससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित होने का डर बना रहता है। गोरखपुर में मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों के पास ऐसे मामले काउंसिलिंग के लिए पहुंच रहे हैं।
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जिला अस्पताल की मनोरोग विभाग की ओपीडी 80-100 मरीजों की है। हर दिन दो से तीन युवा मन में डर लिए आते हैं। बीआरडी में मनोरोग विभाग की ओपीडी 150 मरीजों की है। यहां प्रतिदिन चार से पांच युवा मन में डर लेकर आ रहे हैं।
शहर के अन्य मनोवैज्ञानिकों के पास भी ऐसे युवा पहुंच रहे हैं जो शुरुआत में अपनी समस्या स्वीकार करने से ही बचते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक परेशानी छिपाने से तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
परेशानी थी लेकिन बोला-कोई दिक्कत नहीं
शहर के एक कॉलेज में पढ़ने वाला 19 वर्षीय युवक मानसिक तनाव से गुजर रहा था। इसके बावजूद वह अपनी समस्या स्वीकार करने को तैयार नहीं था। मनोवैज्ञानिक के पास पहुंचने पर उसने कहा कि उसे कोई दिक्कत नहीं है और वह केवल ऐसे ही बातचीत करने आया है। काउंसिलिंग के दौरान धीरे-धीरे बातचीत आगे बढ़ी तो उसने बताया कि उसके भीतर मीम और बुलिंग का डर था, लोग उसका मजाक उड़ाएंगे। इसके बाद विशेषज्ञ ने उसकी काउंसिलिंग शुरू की।
शहर के एक कॉलेज में पढ़ने वाला 19 वर्षीय युवक मानसिक तनाव से गुजर रहा था। इसके बावजूद वह अपनी समस्या स्वीकार करने को तैयार नहीं था। मनोवैज्ञानिक के पास पहुंचने पर उसने कहा कि उसे कोई दिक्कत नहीं है और वह केवल ऐसे ही बातचीत करने आया है। काउंसिलिंग के दौरान धीरे-धीरे बातचीत आगे बढ़ी तो उसने बताया कि उसके भीतर मीम और बुलिंग का डर था, लोग उसका मजाक उड़ाएंगे। इसके बाद विशेषज्ञ ने उसकी काउंसिलिंग शुरू की।
रिश्ते की चिंता से बढ़ा तनाव
21 वर्षीय युवती अपने रिलेशनशिप को लेकर तनाव में है। उसे आशंका है कि परिवार उसके रिश्ते को स्वीकार नहीं करेगा। वह अपनी परेशानी किसी से साझा करने से भी डर रही थी। उसे डर था कि उसकी निजी बात सामने आने पर लोग उसका मीम बनाकर मजाक उड़ाएंगे और उसकी बेइज्जती होगी। लगातार इस चिंता के कारण वह अवसाद के लक्षणों से जूझने लगी। फिलहाल मनोवैज्ञानिक उसकी काउंसिलिंग कर रहे हैं।
21 वर्षीय युवती अपने रिलेशनशिप को लेकर तनाव में है। उसे आशंका है कि परिवार उसके रिश्ते को स्वीकार नहीं करेगा। वह अपनी परेशानी किसी से साझा करने से भी डर रही थी। उसे डर था कि उसकी निजी बात सामने आने पर लोग उसका मीम बनाकर मजाक उड़ाएंगे और उसकी बेइज्जती होगी। लगातार इस चिंता के कारण वह अवसाद के लक्षणों से जूझने लगी। फिलहाल मनोवैज्ञानिक उसकी काउंसिलिंग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया का डर बढ़ा रहा मानसिक दबाव
मनोवैज्ञानिक डॉ. आकृति पांडेय के अनुसार, युवाओं में अपनी निजी जिंदगी और मानसिक परेशानियों को लेकर सामाजिक छवि बनाए रखने का दबाव बढ़ा है। उन्हें लगता है कि कमजोरी या परेशानी सामने आने पर दोस्त या सोशल मीडिया पर मौजूद लोग उनका मजाक उड़ा सकते हैं। ऐसे में वे समस्या साझा करने के बजाय उसे दबाते रहते हैं। भरोसेमंद व्यक्ति से बातचीत और समय पर काउंसिलिंग मददगार हो सकती है।
मनोवैज्ञानिक डॉ. आकृति पांडेय के अनुसार, युवाओं में अपनी निजी जिंदगी और मानसिक परेशानियों को लेकर सामाजिक छवि बनाए रखने का दबाव बढ़ा है। उन्हें लगता है कि कमजोरी या परेशानी सामने आने पर दोस्त या सोशल मीडिया पर मौजूद लोग उनका मजाक उड़ा सकते हैं। ऐसे में वे समस्या साझा करने के बजाय उसे दबाते रहते हैं। भरोसेमंद व्यक्ति से बातचीत और समय पर काउंसिलिंग मददगार हो सकती है।
समय पर करें विशेषज्ञ से संपर्क
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही के अनुसार, मानसिक परेशानी को छिपाने से समस्या खत्म नहीं होती बल्कि कई बार चिंता और अवसाद के लक्षण बढ़ सकते हैं। युवाओं को यह समझना जरूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या भी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की तरह ही है। समय पर विशेषज्ञ से संपर्क करने में शर्म या डर नहीं होना चाहिए। परिवार और दोस्तों को भी युवाओं की बात बिना मजाक उड़ाए और बिना जज किए सुननी चाहिए।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही के अनुसार, मानसिक परेशानी को छिपाने से समस्या खत्म नहीं होती बल्कि कई बार चिंता और अवसाद के लक्षण बढ़ सकते हैं। युवाओं को यह समझना जरूरी है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या भी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की तरह ही है। समय पर विशेषज्ञ से संपर्क करने में शर्म या डर नहीं होना चाहिए। परिवार और दोस्तों को भी युवाओं की बात बिना मजाक उड़ाए और बिना जज किए सुननी चाहिए।