एजुकेशन रिफॉर्म: कर्नाटक सरकार ने बनाई पांच सदस्यीय समिति; परीक्षा, फीस और छात्र कल्याण पर करेगी मंथन
कर्नाटक सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक समिति का गठन किया है। यह समिति शिक्षा क्षेत्र में जरूरी बदलावों पर सुझाव देगी और छात्रों की चिंताओं को दूर करने के उपाय भी बताएगी।
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Karnataka Education Reforms: कर्नाटक सरकार ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियों को समझने के लिए पांच सदस्यीय कैबिनेट उप-समिति बनाई है। यह समिति परीक्षा, फीस, बुनियादी सुविधाओं, कौशल विकास और छात्रों की भलाई से जुड़े सुधारों पर सुझाव देगी।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यूटी खादर इस समिति के अध्यक्ष होंगे। समिति में उच्च शिक्षा मंत्री बसवराज रायरेड्डी, गृह मंत्री प्रियांक खड़गे, चिकित्सा शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री शरण प्रकाश पाटिल और स्कूली शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा शामिल हैं।
किन मुद्दों पर रहेगा फोकस?
- समिति प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के उपायों पर विचार करेगी।
- परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने के लिए सुझाव दिए जाएंगे।
- परीक्षा और भर्ती के लिए एक तय और समयबद्ध कैलेंडर बनाने पर भी विचार होगा।
- निजी शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटरों की फीस को नियंत्रित करने के तरीकों की समीक्षा की जाएगी।
- सरकारी स्कूलों, पीयू कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने पर ध्यान दिया जाएगा।
- शिक्षकों के खाली पद भरने के साथ प्रयोगशाला, पुस्तकालय और छात्रावास जैसी सुविधाएं बढ़ाने पर भी विचार होगा।
- रोजगार के नए अवसरों और उद्योग की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम में बदलाव के सुझाव दिए जाएंगे।
- कौशल विकास, अप्रेंटिसशिप और इंटर्नशिप को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
- उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी मजबूत करने के उपाय सुझाए जाएंगे।
- छात्रों के लिए काउंसलिंग और सहायता व्यवस्था बेहतर करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
- पढ़ाई और परीक्षा के तनाव को कम करने के उपायों पर विचार किया जाएगा।
- कोचिंग सेंटर, हॉस्टल और आवासीय शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और आत्महत्या रोकने के उपायों की भी समीक्षा होगी।
छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दों पर देगी रिपोर्ट
समिति स्कॉलरशिप और आर्थिक मदद, हॉस्टल में सीटों की संख्या, लड़कियों की शिक्षा और SC/ST, OBC, अल्पसंख्यक व पहली पीढ़ी के छात्रों को मिलने वाली सहायता की समीक्षा करेगी।
ज्ञापन के अनुसार, समिति पूरे कर्नाटक में छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षण संस्थानों और अन्य संबंधित लोगों से बातचीत करेगी। जरूरत पड़ने पर विषय विशेषज्ञों की मदद भी ली जा सकती है। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा विभाग को दी गई है।
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