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एफएमजीई जून 2026: ग्रेस मार्क्स देने के फैसले की एनबीईएमएस विशेषज्ञ पैनल ने की जांच, नहीं मिला कोई ठोस आधार

Wed, 26 Aug 2026 11:05 AM IST
Shahin Praveen एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Shahin Praveen Updated Wed, 26 Aug 2026 11:05 AM IST
सार
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एफएमजीई जून 2026 में ग्रेस मार्क्स देने के फैसले को लेकर एनबीईएमएस विशेषज्ञ पैनल की जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। पैनल ने परीक्षा से जुड़े पहलुओं की समीक्षा के बाद ग्रेस मार्क्स को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।

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FMGE June 2026: NBEMS Expert Panel Finds No Evidence to Justify Grace Marks
NBEMS - फोटो : freepik

विस्तार

FMGE June 2026: विदेशी मेडिकल स्नातक परीक्षा (FMGE) के कुछ उम्मीदवार वीडियो आधारित सवालों के लिए ग्रेस मार्क्स की मांग कर रहे हैं। कुछ परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने का आरोप लगाते हुए उम्मीदवार विरोध भी कर रहे हैं। हालांकि, एएनआई सूत्रों के अनुसार, विशेषज्ञ समिति को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि इन समस्याओं का परीक्षा परिणाम पर कोई बड़ा असर पड़ा है।

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एएनआई के सूत्रों ने बताया, "राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) द्वारा चिंताओं की जांच के लिए गठित विशेषज्ञ समिति को परीक्षा परिणाम पर किसी भी महत्वपूर्ण प्रभाव का कोई वस्तुनिष्ठ या सांख्यिकीय प्रमाण नहीं मिला है।"
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एएनआई को आगे बताया, "समिति ने प्रश्न पत्र के कठिनाई स्तर, वीडियो-आधारित प्रश्नों, परीक्षा केंद्रों की स्थिति, उम्मीदवारों के प्रदर्शन, प्रयास-वार परिणामों और लागू नियामक ढांचे की विस्तृत समीक्षा की। इसमें पाया गया कि एफएमजीई जून 2026 की समग्र कठिनाई पिछले सत्रों के लगभग समान थी, जबकि उत्तीर्ण प्रतिशत 12.8% ही रहा, चाहे सभी 300 प्रश्न शामिल हों या 14 वीडियो-आधारित प्रश्नों को हटा दिया गया हो।"
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एएनआई के सूत्रों के मुताबित, "समिति ने यह भी पाया कि शिफ्ट-1 में 78% और शिफ्ट-2 में 88% उम्मीदवारों ने पूरा प्रश्नपत्र हल किया, और उम्मीदवारों ने परीक्षा के समग्र प्रदर्शन की तुलना में वीडियो-आधारित प्रश्नों पर बेहतर प्रदर्शन किया। समिति ने केंद्रों से संबंधित चिंताओं का भी विश्लेषण किया है।"

परीक्षा केंद्रों की शिकायतों की भी हुई जांच

जिन परीक्षा केंद्रों पर ज्यादा गर्मी और वेंटिलेशन की समस्या की शिकायत की गई थी, वहां के परीक्षा परिणामों की भी जांच की गई। जांच में इन केंद्रों के परिणामों में कोई बड़ा अंतर नहीं मिला। इसलिए समिति को वीडियो आधारित सवालों या तापमान से जुड़ी समस्याओं के लिए ग्रेस मार्क्स देने का कोई ठोस आधार नहीं मिला।

समिति ने यह भी कहा कि एफएमजीई में ग्रेस या क्षतिपूर्ति अंक देने में कानूनी और नियमों से जुड़ी कुछ बाधाएं हैं। परीक्षा की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के 2004 के संजीव गुप्ता और अन्य बनाम भारत सरकार और अन्य मामले में दिए गए फैसले से तय दिशा-निर्देशों पर आधारित है।

भविष्य की परीक्षाओं में सुधार की सिफारिश

समिति ने उम्मीदवारों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कई सुधार सुझाए हैं। इनमें मल्टीमीडिया सवालों से पहले उम्मीदवारों को इसकी जानकारी देना, परीक्षा केंद्रों की सुविधाएं और आपातकालीन व्यवस्था बेहतर करना शामिल है। उम्मीदवारों को उनके जवाब और प्राप्त अंकों की जानकारी देकर पारदर्शिता बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है।

समिति ने एफएमजीई परीक्षा साल में कम से कम तीन बार कराने, परीक्षा शुल्क की समीक्षा करने और आसान सवालों की संख्या बढ़ाने का सुझाव भी दिया है। हालांकि, उपलब्ध सबूतों के आधार पर एफएमजीई जून 2026 के परिणाम में बदलाव या ग्रेस मार्क्स देने का कोई आधार नहीं मिला है।

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