डीयू: छात्रों के लिए सुरक्षित और सस्ता आवास जरूरी, एग्जीक्यूटिव काउंसिल सदस्य ने की आपात बैठक की मांग
दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों के सुरक्षित और किफायती आवास का मुद्दा उठाया गया है। एग्जीक्यूटिव काउंसिल के एक सदस्य ने इस विषय पर चर्चा के लिए इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की मांग की है।
विस्तार
दिल्ली विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के एक सदस्य ने छात्रों के लिए सुरक्षित और कम खर्च वाले आवास को लेकर आपात बैठक बुलाने की मांग की है। यह मांग सत्य निकेतन में एक पेइंग गेस्ट (PG) इमारत के ढहने के बाद उठाई गई है।
एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य मिथुनराज धुसिया ने कुलपति योगेश सिंह को पत्र लिखकर बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पांच मंजिला इमारत के गिरने की घटना से पता चलता है कि छात्रों को सुरक्षित, सस्ता और बेहतर आवास देने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए हैं।
DU से स्थायी आवास व्यवस्था बनाने की मांग
धुसिया ने वाइस चांसलर से एग्जीक्यूटिव काउंसिल की आपात बैठक बुलाने की मांग की है, ताकि ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा की जा सके। उन्होंने छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तुरंत उपाय किए जाने की जरूरत बताई।
उन्होंने पत्र में कहा, "दिल्ली यूनिवर्सिटी को अपने कॉलेजों के साथ मिलकर दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर बड़ी संख्या में हॉस्टल समेत सुरक्षित, किफायती और सम्मानजनक आवास सुविधाओं का एक मजबूत सिस्टम बनाना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी को अतिरिक्त आवास सुविधाएं बनाने के लिए जरूरी ग्रांट के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार, दोनों से संपर्क करना चाहिए।
धुसिया ने कहा कि जब तक पर्याप्त सुविधाएं नहीं बन जातीं, तब तक यूनिवर्सिटी को उन छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए संबंधित पक्षों के साथ उचित व्यवस्था करने पर विचार करना चाहिए जिन्हें इसकी जरूरत है।
NDTF ने उठाए ये सवाल और मांगें
- सुरक्षा नियमों पर चिंता: सत्य निकेतन की घटना के बाद दिल्ली में निजी हॉस्टल और PG में स्ट्रक्चरल और फायर सेफ्टी नियमों के पालन को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।
- संकरी गलियों की समस्या: कई हॉस्टल और PG ऐसी जगहों पर हैं, जहां गलियां बहुत संकरी हैं। इससे आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य मुश्किल हो सकता है।
- पूरी जांच की मांग: NDTF ने सत्य निकेतन की घटना की पूरी और तय समय में जांच कराने की मांग की है।
- जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई: लापरवाही या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
- निजी हॉस्टल-PG का निरीक्षण: दिल्ली विश्वविद्यालय और उसके कॉलेजों के आसपास चल रहे निजी हॉस्टल और PG की व्यापक जांच कराने की मांग की गई है।
- सुरक्षा नियमों की जांच: निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी हॉस्टल और PG स्ट्रक्चरल और फायर सेफ्टी नियमों का पालन कर रहे हैं।
- पहले से उठाए गए कदम: NDTF ने कहा कि अधिकारियों, साउथ कैंपस के कॉलेजों और दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना के बाद कुछ कदम उठाए हैं।
- छात्रों-शिक्षकों से बातचीत: संगठन ने यूनिवर्सिटी और कॉलेज प्रशासन से शिक्षकों और छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक बातचीत शुरू करने का सुझाव दिया है।
- बाहर से आए छात्रों पर ध्यान: बातचीत में खास तौर पर दूसरे शहरों से पढ़ने आए छात्रों की आवास और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को शामिल करने की बात कही गई है।
एनडीटीएफ ने क्या दिया सुझाव?
एनडीटीएफ ने इस मुद्दे पर वैधानिक निकायों की बैठकें बुलाने और अंडरग्रेजुएट छात्रों के लिए और हॉस्टल सुविधाएं बनाने के तरीकों पर विचार करने के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाने की भी मांग की।
इसने कहा कि प्रस्तावित टास्क फोर्स को छात्रों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले निजी हॉस्टलों और PG आवासों के नियमों की भी जांच करनी चाहिए, जिसमें सुरक्षा, भोजन और शुल्क से जुड़े मुद्दे शामिल हों। संगठन ने यह भी सुझाव दिया कि कॉलेज छात्रों के स्थानीय पते और रहने की जगहों का सही रिकॉर्ड रखें और उसे नियमित रूप से अपडेट करते रहें।
ये मांगें दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला इमारत के गिरने के बाद उठी हैं, जिससे इलाके में निजी तौर पर चलाए जा रहे छात्रों के आवासों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं।
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