Raksha: एआई से बढ़ेगी बच्चों की सुरक्षा, केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने लॉन्च किया एआई-आधारित रक्षा टूल
Children Safety: जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए एआई टूल 'रक्षा' पेश किया है। इसका अनावरण मंत्री जितिन प्रसाद ने यह बाल ट्रैफिकिंग, बाल विवाह और यौन शोषण रोकने में मदद करता है।
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Children Safety: बच्चों की सुरक्षा के लिए एक नया एआई-आधारित टूल ‘रक्षा’ लॉन्च किया गया है। इसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने ‘प्रॉस्पेरिटी फ्यूचर्स: चाइल्ड सेफ्टी टेक समिट’ में लॉन्च किया। यह टूल बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल विवाह, यौन शोषण और दुर्व्यवहार रोकने में मदद करता है। एआई सक्षम ‘रक्षा’ को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले लांच किया गया है, जो 16 से 20 फरवरी, 2026 तक आयोजित होगा।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने तैयार किया यह टूल
‘रक्षा’ को जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने तैयार किया है। इसका नेटवर्क 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के साथ देश के 451 जिलों में काम करता है। यह टूल बच्चों से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण कर संवेदनशील क्षेत्रों का मानचित्रण, खतरे में बच्चों और समुदायों की पहचान, ट्रैफिकिंग गिरोहों की निगरानी और शोषण के नए रुझानों की जानकारी देता है।
केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा, "प्रौद्योगिकी का असली मूल्य बच्चों की सुरक्षा में है। बच्चे हमारे भविष्य हैं और हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि वे सुरक्षित और सशक्त डिजिटल दुनिया पाएं। ‘रक्षा’ बच्चों की सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए महत्वपूर्ण कदम है।"
उन्होंने कहा कि यह टूल सुदृढ़ बाल संरक्षण प्रणाली बनाने में मदद करेगा और सभी हितधारकों को जोड़कर रचनात्मक विमर्श का मंच प्रदान करेगा।
ऑनलाइन यौन शोषण सामग्री की भी करेगा पहचान
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने बताया कि ‘रक्षा’ के जरिए भारत बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ कर सकता है। यह टूल पूर्वानुमान आधारित रोकथाम, संवेदनशील परिवारों की निगरानी, और ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री की पहचान व विश्लेषण में सक्षम है।
सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा कि एआई बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और जोखिम पूर्वानुमान में मदद करता है। यह सिस्टम केवल डेटा नहीं देता बल्कि मानवीय विवेक को सशक्त करता है और नुकसान होने से पहले हस्तक्षेप संभव बनाता है।
‘रक्षा’ तीन मुख्य तरीके से काम करता है:
- परिवारों की आर्थिक असुरक्षा घटाकर बाल विवाह रोकना।
- ट्रैफिकिंग और संगठित अपराध की जड़ों की पहचान और रोकथाम।
- डिजिटल बाल संरक्षण को सशक्त बनाना, जिसमें बाल यौन शोषण सामग्री की ऑनलाइन पहचान, विश्लेषण और मानचित्रण शामिल है।
नीति आयोग के सहयोग से, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने 2025 में 20 लाख परिवारों को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा, 198,628 बाल विवाह रोके और 55,146 बच्चों को शोषण से मुक्त कराया। टूल ने 73,258 मामले कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर हल किए और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के साथ काम कर बच्चों की ट्रैफिकिंग रोकी।
भारत सरकार का इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ग्लोबल साउथ में पहला आयोजन होगा। इसमें वैश्विक नेता, नीति निर्माता और सीईओ एआई पर विमर्श करेंगे और भारत की बढ़ती भूमिका पर चर्चा करेंगे।
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