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Delhi NCR News: बारिश के पानी को बचाने के मामले में एनजीटी ने डीजेबी को दिया चार सप्ताह का समय
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-यह मामला वर्षा जल संचयन प्रणाली और जमीन के नीचे पानी का स्तर बढ़ाने से जुड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली।
दिल्ली में बारिश के पानी को जमीन के अंदर पहुंचाने और भूजल स्तर सुधारने से जुड़े निर्देशों के पालन को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) से जवाब मांगा है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने डीजेबी को आगे की अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। यह मामला वर्षा जल संचयन प्रणाली और जमीन के नीचे पानी का स्तर बढ़ाने से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने आवेदक की ओर से रखे गए उन बिंदुओं पर विचार किया, जिनमें पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं होने का आरोप लगाया गया था। आवेदक के मुताबिक, बारिश का पानी जमीन में पहुंचाने के लिए बनाई जाने वाली रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली नालों के पास नहीं होनी चाहिए। नालों के पास ऐसी व्यवस्था होने से गंदा पानी जमीन के अंदर जाकर भूजल को प्रदूषित कर सकता है। आरोप है कि डीजेबी समेत कुछ अन्य विभागों ने इस निर्देश का पूरी तरह पालन नहीं किया है।
मामले में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के पास पीजोमीटर लगाने की जरूरत भी बताई गई है। इससे भूजल के स्तर और जमीन के अंदर पहुंचाए जा रहे पानी की गुणवत्ता पर नजर रखी जा सकेगी। इसके अलावा भूजल में पानी पहुंचाने से पहले उसमें मौजूद गंदगी और प्रदूषकों को अलग करने के लिए जरूरी व्यवस्था करने का मुद्दा भी उठाया गया। आवेदक ने कुछ रीचार्ज बोरवेल की गहराई को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई जगह बोरवेल तय मानकों से ज्यादा गहरे बनाए गए हैं। कुछ खराब रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को बंद या ठीक नहीं किए जाने का मुद्दा भी अधिकरण के सामने रखा गया। सुनवाई के दौरान डीजेबी के वकील ने इन आरोपों पर जानकारी लेने और विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा। एनजीटी ने समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 27 अक्तूबर 2026 को तय की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली।
दिल्ली में बारिश के पानी को जमीन के अंदर पहुंचाने और भूजल स्तर सुधारने से जुड़े निर्देशों के पालन को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) से जवाब मांगा है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने डीजेबी को आगे की अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। यह मामला वर्षा जल संचयन प्रणाली और जमीन के नीचे पानी का स्तर बढ़ाने से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने आवेदक की ओर से रखे गए उन बिंदुओं पर विचार किया, जिनमें पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं होने का आरोप लगाया गया था। आवेदक के मुताबिक, बारिश का पानी जमीन में पहुंचाने के लिए बनाई जाने वाली रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली नालों के पास नहीं होनी चाहिए। नालों के पास ऐसी व्यवस्था होने से गंदा पानी जमीन के अंदर जाकर भूजल को प्रदूषित कर सकता है। आरोप है कि डीजेबी समेत कुछ अन्य विभागों ने इस निर्देश का पूरी तरह पालन नहीं किया है।
मामले में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के पास पीजोमीटर लगाने की जरूरत भी बताई गई है। इससे भूजल के स्तर और जमीन के अंदर पहुंचाए जा रहे पानी की गुणवत्ता पर नजर रखी जा सकेगी। इसके अलावा भूजल में पानी पहुंचाने से पहले उसमें मौजूद गंदगी और प्रदूषकों को अलग करने के लिए जरूरी व्यवस्था करने का मुद्दा भी उठाया गया। आवेदक ने कुछ रीचार्ज बोरवेल की गहराई को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई जगह बोरवेल तय मानकों से ज्यादा गहरे बनाए गए हैं। कुछ खराब रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को बंद या ठीक नहीं किए जाने का मुद्दा भी अधिकरण के सामने रखा गया। सुनवाई के दौरान डीजेबी के वकील ने इन आरोपों पर जानकारी लेने और विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा। एनजीटी ने समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 27 अक्तूबर 2026 को तय की है।
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