अब पैसे वाले ही कर पाएंगे मुंह मीठा: चीनी 65 रुपये किलो तक पहुंची, गुड़ भी 100 पार, बादाम भी निकाल रहा दम
पिछले 15 दिनों में चीनी 17 रुपये और गुड़ 40 रुपये प्रति किलोग्राम महंगा हुआ है। एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के उपयोग से चीनी की उपलब्धता घटी, जिससे रसोई का बजट बिगड़ रहा है।
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कभी घर का मामूली सामान मानी जाने वाली चीनी अब रसोई का बजट बिगाड़ने लगी है। पिछले करीब 15 दिनों में चीनी के दाम में करीब 17 रुपये और गुड़ में 40 रुपये प्रतिकिलोग्राम महंगा हो गया है। चीनी अब अलग अलग बाजारों में 65 से 67 रुपये किलो तक बिक रही है, जबकि गुड़ का भाव 100 रुपये किलो तक पहुंच गया है। अचानक बढ़े दाम से आम लोगों के साथ साथ मिठाई, हलवाई, बेकरी और चाय की दुकानों पर भी खर्च बढ़ गया है।
त्योहारों का मौसम शुरू होने के साथ चीनी की मांग और बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में कारोबारियों को आशंका है कि अगर कीमतों पर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में लोगों को और महंगी चीनी खरीदनी पड़ सकती है।
रिटेल कारोबारी पीयूष के मुताबिक, करीब 15 दिन पहले चीनी 48 रुपये किलो के आसपास बिक रही थी। अब इसका भाव बढ़कर 65 से 67 रुपये किलो तक पहुंच गया है। कारोबारियों के अनुसार, 15 दिन पहले गुड़ करीब 60 रुपये किलो बिक रहा था। अब इसकी कीमत करीब 100 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
बादाम भी हुआ महंगा
कारोबारियों के मुताबिक, केवल चीनी और गुड़ ही नहीं, मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाले दूसरे सामान के दाम भी बढ़े हैं। एक महीने पहले करीब 900 रुपये किलो मिलने वाला बादाम अब 1,100 रुपये किलो तक पहुंच गया है। चीनी के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह एथेनॉल उत्पादन को भी माना जा रहा है। पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल की मांग लगातार बढ़ी है।
इसे तैयार करने में गन्ने के रस और सीरप का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे चीनी बनाने के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा पर असर पड़ा है। चीनी मिलों में गन्ने की उपलब्धता कम होने से चीनी का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। कारोबारियों के अनुसार, गन्ने से चीनी और एथेनॉल बनाने के बीच संतुलन बिगड़ने का असर अब बाजार में दिखाई दे रहा है।