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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Nithari Case: Surendra Koli committed suicide by hanging himself in Haridwar

कौन था सुरेंद्र कोली : 26 साल पहले पंढेर से मुलाकात, काम की तलाश में आया दिल्ली; ऐसे बना निठारी कांड का आरोपी

Fri, 18 Sep 2026 01:48 PM IST
Akash Dubey अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: Akash Dubey Updated Fri, 18 Sep 2026 01:48 PM IST
सार
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चर्चित निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उसे नोएडा के निठारी इलाके में एक के बाद एक कई नरकंकाल मामले में कई बार मौत की सजा मिली थी। कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद 16 अक्तूबर 2023 को बरी हो गया था।

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Nithari Case: Surendra Koli committed suicide by hanging himself in Haridwar
Nithari Case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है। नोएडा के निठारी इलाके में एक के बाद एक कई नरकंकाल मामले में कोली सह आरोपी था। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई के बाद कोली को अंतिम केस में भी बरी कर दिया गया था। कोली की मौत की खबर सामने आने के बाद से सुरेंद्र कोली एक बार फिर चर्चा में आ गया। जानिए कौन था सुरेंद्र कोली? 

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सुरेंद्र कोली स्वादिष्ट खाना बनाने का एक्सपर्ट था लेकिन गरीबी की वजह से वह अपने गांव में खुद खाने के लिए मोहताज रहता था। उसका परिवार बेहद गरीबी में अल्मोड़ा के पास के एक गांव में गुजारा करता था। अब से करीब 26 साल पहले वह गांव की बकरियों की देखरेख करता था। साल 2000 से उसकी जिंदगी में नया मोड़ आया जब उसकी मुलाकात दिल्ली में रहने वाले एक ब्रिगेडियर से हुई। कोली के स्वादिष्ट खाना बनाने के बारे में जब ब्रिगेडियर को पता चला तब उन्होंने उसे नौकरी पर रख लिया था। इसके बाद से वह ब्रिगेडियर के साथ गांव से दिल्ली चला आया। यहां वह उनके घर पर ही रहकर खाना बनाता था और साफ-सफाई करता था। तब तक वह सामान्य जिंदगी गुजार रहा था। उस समय तक उसका कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं था। न ही वह बच्चों के साथ किसी तरह की अभद्रता के आरोप में फंसा था। 

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इस केस का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाने वाले नोएडा के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ब्रिगेडियर के घर पर वह काफी मेहनत से काम करता था। लेकिन वर्ष 2003 में ब्रिगेडियर को दिल्ली से बाहर जाना पड़ गया। इसके बाद कोली मोनिंदर सिंह पंढेर के संपर्क में आया। वह दिल्ली या इसके आसपास ही रहकर काम करना चाहता था। इसलिए वह पंढेर के नोएडा सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी में काम करने को तैयार हो गया था। पंढेर के कहने पर ही कोली अपनी पत्नी को भी नोएडा ले आया था। इस दौरान पंढेर की पत्नी भी नोएडा में रह रही थी।

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क्या है निठारी कांड
निठारी कांड वर्ष 2006 में उस समय सुर्खियों में आया था जब नोएडा के निठारी गांव में कई बच्चों के कंकाल मिले थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। जिसके बाद पुलिस ने पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया था।

पत्नी के जाने के बाद हैवान बना कोली
वर्ष 2004 में पंढेर का परिवार नोएडा से पंजाब चला गया था। इसके बाद कोली ने भी अपनी पत्नी को गांव भेज दिया था। इस तरह कोठी में पंढेर और कोली ही अब रहने लगे थे। कई महीनों तक अकेले रहने के दौरान ही सामान्य रहने वाले कोली की जिंदगी में हैवानियत की शुरुआत हुई थी। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि कोठी में अक्सर कॉल गर्ल आया करती थीं।

उनके लिए कोली ही खाने से लेकर अन्य व्यवस्था करता था। इसी दौरान वह उनसे भी नजदीकी बढ़ाना चाहता था लेकिन नौकर होने की वजह से कामयाब नहीं हो पाता था। इसलिए वह धीरे-धीरे नेक्रोफीलिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रसित होता गया था। 

जब रातोंरात टल गई थी फांसी
9 सितंबर 2014, सुरेंद्र कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जानी थी। कोली को मेरठ जेल की एक हाई सिक्योरिटी वाली बैरक में रखा गया। तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इसी बीच सुरेंद्र कोली की फांसी पर रोक से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर जेल प्रशासन को तड़के तकरीबन 4 बजे मेरठ के डीएम के जरिए मिला। इस बात की जानकारी खुद तत्कालीन वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने दी थी।

मामले को ऐसे समझिए-

 

  • 29 दिसंबर 2006 - सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के पास बच्चों के नरकंकाल मिले। 
  • 14 जनवरी 2006 - निठारी कांड की जांच सीबीआई ने शुरू की। 
  • 13 फरवरी 2009 - सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर पंढेर को सजा-ए-मौत। हाईकोर्ट से पंढेर बरी।
  • 12 मई 2010 - सुरेंद्र कोली को सजा-ए-मौत
  • 28 अक्तूबर 2010 - सुरेंद्र कोली  को सजा-ए-मौत
  • 22 दिसंबर 2010 - सुरेंद्र कोली  को सजा-ए-मौत
  • 24 दिसंबर 12 - सुरेंद्र कोली को सजा-ए-मौत
  • 7 अक्तूबर 2016 - सुरेंद्र कोली को  सजा-ए-मौत
  • 16 दिसंबर 2016 -सुरेंद्र कोली  को सजा-ए-मौत
  • 24 जुलाई 2017 सुरेद्र कोली को सजा-ए-मौत, पंढेर बरी
  • 8 दिसंबर 2017- सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर पंढेर - दोनों को सजा-ए-मौत
  • 2 मार्च 2019 -सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर पंढेर - कोली को सजा-ए-मौत- पंढेर बरी
  •  6 अप्रैल 2019 -सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर पंढेर - कोली को सजा-ए-मौत। पंढेर बरी
  • 16 जनवरी 2021- सुरेंद्र कोली - फांसी 
  • 26 मार्च 2021 -सुरेंद कोली बरी
  • सात जनवरी 2022 सुरेंद्र कोली बरी
  • 22 जनवरी 2022 सुरेंद्र कोली बरी
  • 16 अक्तूबर 2023 मोनिंदर पंढेर व सुरेंद्र कोली बरी। 
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