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UP: परीक्षा केंद्रों में मिली पेपर लीक गिरोह की हिस्सेदारी, STF जांच में खुलासा, पांच राज्यों में फैला नेटवर्क

Fri, 21 Aug 2026 09:11 AM IST
Vijay Singh Pundir सुशांत समदर्शी, अमर उजाला, नोएडा
सुशांत समदर्शी, अमर उजाला, नोएडा Published by: Vijay Singh Pundir Updated Fri, 21 Aug 2026 09:11 AM IST
सार
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लोकेश से एसटीएफ की पूछताछ में पता चला कि गिरोह से जुड़े आरोपियों के पास परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, कंप्यूटर सिस्टम और निगरानी तंत्र की विस्तृत जानकारी थी। लोकेश के पास से 92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन बरामद की गई थी। 

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Involvement of a paper-leak gang in examination centers revealed during Noida STF investigation
नोएडा एसटीएफ की जांच में हुआ खुलासा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एसएससी समेत ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाला गिरोह के तार परीक्षा केंद्रों से जुड़े होने का खुलासा हुआ है। 31 जुलाई को नोएडा एसटीएफ की ओर से गिरफ्तार किए गए आरोपी लोकेश से पूछताछ में सामने आया है कि नकल कराने वाला यह नेटवर्क सिर्फ अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने तक सीमित नहीं था। गिरोह से जुड़े जालसाजों की परीक्षा केंद्रों में भी हिस्सेदारी थी। एसटीएफ के मुताबिक नेटवर्क से जुड़े आरोपी परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं और तकनीकी सिस्टम की जानकारी जुटाकर नकल कराते थे।

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लोकेश से एसटीएफ की पूछताछ में पता चला कि गिरोह से जुड़े आरोपियों के पास परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, कंप्यूटर सिस्टम और निगरानी तंत्र की विस्तृत जानकारी थी। लोकेश के पास से 92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन बरामद की गई थी। एसटीएफ को पता चला है कि लोकेश वर्ष 2017 से इन स्क्रीन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तैयार कर अलग-अलग राज्यों में सक्रिय नकल गिरोहों को उपलब्ध करा रहा था। अब तक की जांच में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में नेटवर्क होने की जानकारी मिली है। एसटीएफ जांच में सामने आया है कि लोकेश खुद उपकरण तैयार करता था और जरूरत के मुताबिक नकल गिरोहों को सप्लाई करता था।

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एसटीएफ एसपी राजकुमार मिश्र ने बताया कि अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए गिरोहों की जरूरत अलग होती थी। इसी के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार कर उपलब्ध कराए जाते थे। इससे लग रहा है कि यह कोई अस्थायी व्यवस्था नहीं बल्कि लंबे समय से चल रहा संगठित कारोबार था। अब एसटीएफ यह पता लगा रही है कि सात-आठ वर्षों में कितनी परीक्षाओं तक यह नेटवर्क पहुंचा और कितने अभ्यर्थियों ने इसका इस्तेमाल किया है। ऐसे में जांच की एक कड़ी परीक्षा केंद्रों से जुड़े लोगों और पूर्व कर्मचारियों तक भी पहुंची है। एसटीएफ यह देख रही है कि जिन केंद्रों पर नकल की शिकायत या संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं, वहां तैनात कर्मचारियों, तकनीकी स्टाफ और अन्य लोगों का किसी आरोपी से संपर्क था या नहीं।

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22 मई को खुला था हाईटेक नकल का मामला
नॉलेज पार्क स्थित परीक्षा केंद्र में 22 मई 2026 को एसएससी ऑनलाइन परीक्षा के दौरान हाईटेक नकल कराने के मामले का खुलासा हुआ था। प्रॉक्सी सर्वर और सर्वर हैकिंग के जरिये नकल कराने की कोशिश की जा रही थी। मामले में पहले सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद इंद्रजीत उर्फ योगी की गिरफ्तारी और पूछताछ में अलवर निवासी लोकेश का नाम सामने आया था।

दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा भी रडार पर
लोकेश से पूछताछ में यह सामने आया है कि मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन का इस्तेमाल केवल एसएससी परीक्षा में नहीं किया गया। अब दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा समेत कई अन्य प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में इन उपकरणों के इस्तेमाल की जांच की जा रही है। एसटीएफ यह मिलान कर रही है कि लोकेश ने कब-कब किस गिरोह को उपकरण दिए और उसी अवधि में संबंधित राज्यों में कौन-कौन सी ऑनलाइन भर्ती परीक्षाएं आयोजित हुई थीं। यदि सप्लाई और परीक्षा की तारीखों के बीच संबंध मिलता है तो जांच तेजी से आगे बढ़ेगी।

एसटीएफ इन सवालों का ढूंढ रही जवाब
  • 2017 से अब तक कितनी परीक्षाओं में इन उपकरणों का इस्तेमाल हुआ।
  • पांच राज्यों में सक्रिय छह से अधिक गिरोहों तक स्क्रीन कैसे पहुंचीं।
  • क्या परीक्षा केंद्रों के अंदर भी नेटवर्क के संपर्क मौजूद थे।
  • दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा समेत कितनी भर्ती परीक्षाएं प्रभावित हुईं।
  • 92 स्क्रीन के अलावा अब तक कितने उपकरण और किस-किस को सप्लाई किए गए।

प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता को प्रभावित करने वाले इस संगठित नेटवर्क की जांच की जा रही है। जांच में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। -राजकुमार मिश्र, एसपी, एसटीएफ

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