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Ghaziabad News: चना बीज सब्सिडी घोटाले में आरटीओ गणपति ने दर्ज कराया बयान
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सीबीआई जांच के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन की दी जानकारी, अदालत ने 26 अगस्त तय की अगली सुनवाई
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। बहुचर्चित चना बीज छूट (सब्सिडी) घोटाले में बृहस्पतिवार को अदालत में राजस्थान के आरटीओ गणपति ने उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने अदालत को बताया कि सीबीआई की जांच के दौरान उनके स्तर से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था। बयान दर्ज होने के बाद अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 26 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2013-14 में हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड्स लिमिटेड (एचआईएल) के अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच कथित मिलीभगत से चना बीज की बिक्री में हुई अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि बिना किसी अधिकृत आवंटन के 3983.50 क्विंटल प्रमाणित चना बीज को सब्सिडी दरों पर एक निजी फर्म को बेच दिया गया। सरकारी योजना के तहत किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी का लाभ कथित तौर पर निजी पक्ष को पहुंचाया गया।
सीबीआई के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया से एचआईएल को करीब 87.63 लाख रुपये का नुकसान हुआ। जांच एजेंसी का आरोप है कि एके नारंग, उनकी कंपनी और अन्य सह-आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से साजिश रची। इसके तहत कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और बिना वैध लाइसेंस के लेन-देन करते हुए नियमों के विपरीत बीज का वितरण किया गया।
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जांच के दौरान सीबीआई ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, लेटरहेड, समझौते और वित्तीय अभिलेख बरामद किए थे। एजेंसी का दावा है कि इन दस्तावेजों से आरोपियों के बीच कथित मिलीभगत के संकेत मिले। सीबीआई के अनुसार महाराष्ट्र की एक संस्था के माध्यम से बुलंदशहर और अनूपशहर में निजी फर्मों को बीज बेचा गया था।
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माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। बहुचर्चित चना बीज छूट (सब्सिडी) घोटाले में बृहस्पतिवार को अदालत में राजस्थान के आरटीओ गणपति ने उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने अदालत को बताया कि सीबीआई की जांच के दौरान उनके स्तर से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था। बयान दर्ज होने के बाद अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 26 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2013-14 में हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड्स लिमिटेड (एचआईएल) के अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच कथित मिलीभगत से चना बीज की बिक्री में हुई अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि बिना किसी अधिकृत आवंटन के 3983.50 क्विंटल प्रमाणित चना बीज को सब्सिडी दरों पर एक निजी फर्म को बेच दिया गया। सरकारी योजना के तहत किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी का लाभ कथित तौर पर निजी पक्ष को पहुंचाया गया।
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सीबीआई के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया से एचआईएल को करीब 87.63 लाख रुपये का नुकसान हुआ। जांच एजेंसी का आरोप है कि एके नारंग, उनकी कंपनी और अन्य सह-आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से साजिश रची। इसके तहत कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और बिना वैध लाइसेंस के लेन-देन करते हुए नियमों के विपरीत बीज का वितरण किया गया।
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जांच के दौरान सीबीआई ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, लेटरहेड, समझौते और वित्तीय अभिलेख बरामद किए थे। एजेंसी का दावा है कि इन दस्तावेजों से आरोपियों के बीच कथित मिलीभगत के संकेत मिले। सीबीआई के अनुसार महाराष्ट्र की एक संस्था के माध्यम से बुलंदशहर और अनूपशहर में निजी फर्मों को बीज बेचा गया था।