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टैरिफ और हम: भारत बाहरी दबावों के आगे झुकने वाला नहीं, अब इसी स्वतंत्र निर्णय क्षमता की परीक्षा
Sat, 19 Sep 2026 08:38 AM IST
न्यूज डेस्क
अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: न्यूज डेस्क
Updated Sat, 19 Sep 2026 08:38 AM IST
अमेरिका ने 100 फीसदी टैरिफ वसूने की तैयारी की है। ट्रंप ने विधेयक को मंजूरी दे दी है। ऐसे में अब भारत के स्वतंत्र निर्णय क्षमता की परीक्षा है। इसी बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत बाहरी दबावों के आगे झुकने वाला नहीं है।
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अमेरिका से ट्रंप ने 100% टैरिफ नीति को मंजूरी (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत समेत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले विधेयक के अमेरिकी संसद में पारित होने पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने जो चेतावनी दी है, वह महाशक्ति देश अमेरिका के लिए कड़ा संदेश है कि भारत बाहरी दबावों के आगे झुकने वाला नहीं है।
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गौरतलब है कि अमेरिका नए कानून के जरिये भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी में है, जबकि भारत ने उचित ही स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश की 140 करोड़ से ज्यादा आबादी की ऊर्जा जरूरतें पूरी करना उसकी प्राथमिकता है। लिहाजा ‘भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अलग-अलग देशों से तेल और गैस खरीदना जारी रखेगा और बाजार में बदलाव के हिसाब से फैसले लेगा।’ उल्लेखनीय है कि अमेरिका भारतीय उत्पादों के निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है, जहां देश के कुल निर्यात का करीब बीस फीसदी खपाया जाता है।
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वर्ष 2025-26 में भारत ने अमेरिका को 87.3 अरब डॉलर का निर्यात किया। ऐसे में, टैरिफ बढ़ाने से भारतीय निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। पिछली बार जब अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ थोपा था, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात बेहद महंगा हो गया था, जिससे कपड़ा, इंजीनियरिंग और अन्य श्रम आधारित उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। अब यदि भारतीय उत्पादों पर अमेरिका 100 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ थोपता है, तो इससे अमेरिका में भारतीय सामान दोगुना महंगा हो सकता है, जिससे अमेरिकी बाजार पर निर्भरता वाले उद्योगों पर बुरा असर पड़ेगा। इससे भारत-अमेरिका व्यापार संतुलन, रुपये के मूल्य और रिफाइनरी लाभ पर भी गंभीर दबाव पड़ सकता है।
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यही भारत के सामने वास्तविक चुनौती है। एक ओर सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति के लिए रूसी कच्चा तेल जरूरी है, तो दूसरी ओर अमेरिका जैसे बड़े बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बनाए रखना भी आवश्यक है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस तरह के कदम अमेरिका-भारत के द्विपक्षीय और व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत भी चल रही है, इसलिए टैरिफ का नया दबाव आर्थिक संबंधों के साथ व्यापक रणनीतिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है।
ऐसे में, भारत को ऊर्जा स्रोतों में विविधता बढ़ाना, नए बाजार तलाशना, निर्यातकों को संभावित झटके से बचाने के उपाय करना और अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखना-इन सभी मोर्चों पर एकसाथ काम करना होगा। रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ किसी एक देश के साथ संबंधों को प्राथमिकता देना नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक माहौल में अपने दीर्घकालिक आर्थिक व राष्ट्रीय हितों के अनुरूप स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता बनाए रखना है। भारत के सामने अब इसी क्षमता की परीक्षा है।