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शिक्षक को खुद जुनून से भरना होगा: एल्गोरिदम के दौर में छात्रों की भावनाओं को छूना प्रभावी शिक्षण, जरूरत समझें
Sat, 05 Sep 2026 09:16 AM IST
ज्योति भास्कर
मैट डिनन (प्रोफेसर और लेखक)
मैट डिनन (प्रोफेसर और लेखक)
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 05 Sep 2026 09:16 AM IST
एल्गोरिदम के इस दौर में प्रभावी शिक्षण वही है, जो छात्रों की भावनाओं को छू सके। अगर आज के समय छात्रों में सीखने का जुनून जगाना है, तो जैसा कि फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की ने भी लिखा है कि पहले शिक्षक को खुद जुनून से भरना होगा।
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- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पिछले सेमेस्टर में मैंने पहली बार फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की द्वारा लिखी द ब्रदर्स कारामाजोव पढ़ी। दुनिया के महानतम उपन्यासों में शुमार इस हजार पन्नों की किताब से मेरा परिचय इतनी देर से हुआ, यह लगभग पेशेवर लापरवाही थी। इसलिए, जब मेरे साथी शिक्षक एलन ने सुझाव दिया कि हम अपने छात्रों को यह किताब पढ़ने के लिए दें, तो मैंने तुरंत हामी भर दी। लेकिन, मुझे क्या पता था कि छात्रों को पढ़ाने के लिए चुनी गई यह किताब खुद मुझे ही पढ़ने लगेगी।
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इस किताब ने मुझे अपने भीतर कुछ इस तरह से खींच लिया, जैसा किसी किताब ने वर्षों या शायद दशकों से नहीं खींचा था। और मैं इस अनुभव में अकेला नहीं था। एक तरफ एआई के दौर में शिक्षा के भविष्य को लेकर मेरे पेशे के सामने एक बड़ा संकट खड़ा था, तो दूसरी तरफ मैं अपने कॅरिअर के सबसे सुंदर पलों में से एक जी रहा था। सेमिनार रूम में कदम रखते ही मुझे अक्सर अपने छात्रों की आवाजें सुनाई देतीं। वे दिमित्री कारामाजोव की उथल-पुथल भरी प्रेम-कहानी और उसकी खुद को तबाह कर देने वाली जिंदगी पर ऐसे जोश से बहस कर रहे होते, जैसे दिमित्री कोई डेढ़ सौ साल पुराना साहित्यिक पात्र नहीं, बल्कि उनके साथ रहने वाला कोई दोस्त हो। वे इस बात पर भी बहस करते कि जिद्दी और बुद्धिमान भाई इवान कारामाजोव अपनी निराशा से कैसे बाहर निकल सकता है और कौन-सी किताबें इसमें उसकी मदद कर सकती हैं। उनकी दलीलें कई बार मुझे गलत लगती थीं, लेकिन वे पूरी तरह जीवंत थीं।
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दरअसल, मेरे छात्र इस किताब की कहानी से जिस तरह जुड़ गए, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। लेकिन, जैसा कि द ब्रदर्स करामाजोव का कथावाचक कहता है, ‘चमत्कार यथार्थवादी को कभी परेशान नहीं करते।’ उच्च शिक्षा के मामले में यथार्थवादी होने का मतलब है यह मानना कि हमारे समय की चुनौती मुख्य रूप से बौद्धिक नहीं, बल्कि भावनात्मक व आध्यात्मिक भी है। एल्गोरिदम के इस दौर में प्रभावी शिक्षण वही है, जो छात्रों की भावनाओं को छू सके। आज शिक्षा की समस्याओं के लिए अक्सर ध्यान या एकाग्रता की कमी को जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन, यह समझने के लिए कि शिक्षा लोगों को कैसे बदलती है, केवल ‘ध्यान’ शब्द पर्याप्त नहीं है। असल में, हम जुनून की बात कर रहे हैं। जुनून जीवन के मकसद को स्पष्ट करता है और काम को तुरंत करने की ऊर्जा देता है। यही एल्गोरिदम के दौर में होने वाले निरर्थक और सतही भटकाव का सही जवाब भी है।
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जब मैंने अपने छात्रों से पूछा कि उन्हें क्यों लगता है कि दोस्तोयेव्स्की आज भी इतने लोकप्रिय हैं, तो उन्होंने दो कारण बताए। पहला, वे उपन्यास के किरदारों के जज्बात से बहुत प्रभावित हुए। एक छात्र ने कहा कि द ब्रदर्स करामाजोव के किरदार जिंदगी को ‘पूरी शिद्दत और जोश’ के साथ जीते हैं। वह हर अनुभव को उसकी चरम सीमा तक ले जाते हैं, उससे कुछ हासिल करते हैं और उसे एक छोटे-से गांव में ले आते हैं। यह हमें दिखाता है कि जिंदगी को बदलने वाला असली जुनून कैसा होता है और साथ ही अपने पाठकों में भी वैसा ही कुछ जगाने की कोशिश करता है। दूसरा, छात्रों ने बताया कि मेरे उत्साह ने भी उनमें जोश भर दिया।
प्लेटो के गुस्सैल किरदार ‘मेनो’ के समय से ही शिक्षकों के सामने यह सवाल रहा है कि पढ़ाई शुरू होने से पहले ही छात्रों में सीखने की इच्छा कैसे पैदा की जाए। कई दशकों से उच्च शिक्षा ने इसका एक व्यावहारिक रास्ता अपनाया है-अच्छी नौकरी मिलने की संभावना को पढ़ाई में सफलता से जोड़ देना। कई बार पैसा और प्रतिष्ठा पाने की चाहत से अनजाने में ही वास्तविक सीखने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, पर लार्ज लैंग्वेज मॉडल ने इस व्यवस्था को बदल दिया है। द ब्रदर्स कारामाजोव के साथ अपने अनुभव से मैंने एक नई बात सीखी कि अगर आप चाहते हैं कि छात्र पूरे जोश के साथ सीखने से जुड़ें, न कि भविष्य की चिंता में डूबे रहें, सिर्फ चीजें हासिल करने या कॅरिअर बनाने में लगे रहें, या पढ़ाई से दूर भागें, तो आपको अपने काम, व्यवहार और सच कहें, तो अपनी आत्मा में भी जुनून की चिंगारी जलानी होगी। अगर आप चाहते हैं कि आपके छात्र शॉर्टकट और ध्यान भटकाने वाली चीजों के बजाय किताबों, नए विचारों और वास्तविक सीख को चुनें, तो आपको थोड़ा साहसी और अलग होना पड़ेगा। इसलिए, बुनियादी बातों पर लौटिए। जटिल शब्दावली, किताबी भाषा और दिखावटी पेशेवर रवैये से आगे बढ़कर उन बुनियादी मानवीय अनुभवों को फिर से खोजने की कोशिश कीजिए, जो हमें भीतर तक छूते हैं। एक अच्छा शिक्षक बनने के लिए थोड़ा अजीब, यहां तक कि थोड़ा बचकाना होना भी जरूरी है। किसी चीज से गहराई से जुड़ने या प्रभावित होने का मतलब ही थोड़ा अजीब होना है।
द ब्रदर्स कारामाजोव के अंत में उपन्यास का नायक और कारामाजोव भाइयों में सबसे छोटा, अल्योशा, कोलिया नाम के एक समझदार लड़के का दिल जीतने की कोशिश करता है। कोलिया हर बात पर शक करना ही समझदारी मानता है। लेकिन, अल्योशा की बातों में न तो दिखावटी भाषणबाजी है, न जरूरत से ज्यादा भावुकता। इसके बजाय वह उस नौजवान की बात को गंभीरता से लेता है और उसके साथ एक बड़े इन्सान की तरह व्यवहार करता है। हम अक्सर भूल जाते हैं कि किसी अनजान बड़े व्यक्ति का किसी नौजवान से गंभीरता और सम्मान के साथ पेश आना उसके लिए कितना बड़ा बदलाव ला सकता है। अल्योशा कोलिया के साथ पूरी तरह जुड़ा रहता है और उससे ईमानदारी से बात करता है। आखिर में कोलिया दुनिया से जल्दी ऊब जाने वाली अपनी निराशावादी सोच छोड़कर जिंदगी को ज्यादा खुले दिल से स्वीकार करने लगता है। एल्गोरिदम के इस दौर की चुनौतियां हैं, पर यह बात हमेशा से सच रही है कि दूसरों को सिखाने वाले अच्छे शिक्षकों को खुद भी एक आदर्श विद्यार्थी बने रहना चाहिए।
दोस्तोयेव्स्की के अनुसार, दुनिया की आम समझ हमें अनजाने में मूर्ख बना सकती है। जैसा कि अल्योशा ने बेहद सही कहा है, सभी योग्य लोग 'मजाक का पात्र बनने से बहुत डरते हैं, और यही बात उन्हें दुखी करती है।' आज के दौर में खुद को हमेशा सीखने के लिए उत्सुक विद्यार्थी बनाए रखना शायद अजीब या हास्यास्पद लगे, लेकिन वास्तव में यह शिक्षा की जरूरतों को यथार्थवादी नजरिये से समझने के अलावा कुछ नहीं है।