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ब्रिक्स की राह: क्या गर्मजोशी के बाद तालमेल भी दिखेगा, वैश्विक संगठन के लिए कौन सी चुनौती सबसे बड़ी?

Sat, 12 Sep 2026 10:07 AM IST
न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: न्यूज डेस्क Updated Sat, 12 Sep 2026 10:07 AM IST
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Path for BRICS Will alignment follow warmth of business forum biggest challenge for global organization
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले हुई वार्ता का द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ बदलती वैश्विक राजनीति के लिहाज से भी बहुत व्यापक और गहरा मतलब है। पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद, भारत का रूस के साथ खड़े रहने का संदेश साफ है कि वह मित्रता निभाते हुए भी अपनी विदेश नीति को किसी खेमे में सीमित नहीं करना चाहता। अगर भारत इसी संतुलन को शिखर सम्मेलन के सामूहिक एजेंडे में बदल सका, तो यह बदलती वैश्विक व्यवस्था में उसकी कूटनीतिक भूमिका को रेखांकित करने वाला अहम अवसर भी साबित होगा।


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आज जब इस जोड़ी के साथ शिखर सम्मेलन के मंच पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी आ खड़े होंगे, तो पूरी दुनिया को यह संदेश जाएगा कि इस बहुपक्षीय दुनिया में विभिन्न संस्कृतियों और शासन प्रणालियों के बावजूद, ब्रिक्स के सदस्य देश वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती से मुखरित कर सकते हैं।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ करीब 40 मिनट की बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने आपसी हित के अहम क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की। इनमें पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्ष शामिल हैं, जिनका समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर असर पड़ा है। बातचीत और कूटनीति को ही संघर्षों को सुलझाने का उचित तरीका बताकर प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया को यह संदेश भी दिया कि भारत वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद शांति मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

दोनों नेता ‘खास और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का न्योता भी दिया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया, हालांकि शिखर सम्मेलन की तारीखें अभी निर्धारित नहीं हुई हैं।

पुतिन के बाद, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ भी प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय वार्ता इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक परिस्थितियां चाहे कितनी भी विषम हों, भारत अपने मित्र देशों का साथ नहीं छोड़ता।

भारत मंडपम में ब्रिक्स बिजनेस फोरम की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति पुतिन समेत कई वैश्विक नेताओं ने शिरकत की, जो ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ते व्यावसायिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मोदी-पुतिन वार्ता में दिखी गर्मजोशी के बाद उम्मीद की जानी चाहिए कि अब ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच भी ऐसा ही तालमेल दिखेगा, जो इस वैश्विक संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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