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नशे के विरुद्ध त्रिशूल: पूर्वोत्तर में नशे के अवैध कारोबार का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क ध्वस्त, ऐसी निरंतरता जरूरी
Tue, 27 Oct 2026 03:14 AM IST
न्यूज डेस्क
अमर उजाला, नई दिल्ली।
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Published by: न्यूज डेस्क
Updated Tue, 27 Oct 2026 03:14 AM IST
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ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत पूर्वोत्तर राज्यों में नशे के अवैध कारोबार का संचालन कर रहे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त किया जाना नशा मुक्त भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब जरूरत इसी निरंतरता को कायम रखने की है।
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नशे के खिलाफ भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई
- फोटो :
अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
देश में नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट (त्रिशूल)’ के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में एकसाथ हुई छापेमारी, गिरफ्तारियां और करोड़ों रुपयों के हवाला नेटवर्क का खुलासा मादक पदार्थों के संगठित तंत्र को तोड़ने की दिशा में एक बड़ी सफलता है।
दरअसल, नशीले पदार्थों की तस्करी अब केवल चोरी-छिपे माल की आवाजाही तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ऐसे संगठित अपराध का रूप ले चुकी है, जिसका संचालन सीमा पार संपर्कों, अवैध धन के लेनदेन और सुनियोजित आपूर्ति शृंखलाओं के जरिये होता है। ऐसे में, ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत 38 ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी और 1,424 बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई साफ दर्शाती है कि जांच एजेंसियां केवल मोहरों को पकड़ने के बजाय, इस अवैध कारोबार की रीढ़, यानी इसके वित्तीय आधार पर प्रहार कर रही हैं।
गौरतलब है कि नशे का यह अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के बीच अवैध रास्तों से नशीले पदार्थों की बेखौफ तस्करी कर रहा था। असम, मिजोरम और मणिपुर की भौगोलिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से निकटता के कारण यहां सीमा पार तस्करी रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है।
म्यांमार में जारी राजनीतिक अस्थिरता तथा उसके आसपास सक्रिय मादक पदार्थों के अवैध कारोबार ने इस संकट को और गंभीर बनाया है। ऐसे में, तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाने की जरूरत है।
नशे के अवैध कारोबार का प्रभाव केवल राष्ट्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसका सबसे गंभीर असर युवाओं के स्वास्थ्य, परिवारों और सामाजिक व्यवस्था पर पड़ता है। इसलिए, तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई के साथ नशे की मांग कम करने, युवाओं को जागरूक बनाने और नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों के उपचार एवं पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करना भी आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त, यह भी जरूरी होगा कि अवैध कमाई के स्रोतों पर चोट की जाए, अपराधियों को सजा दिलाने के लिए ठोस साक्ष्य जुटाए जाएं और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बना रहे। केंद्रीय गृह मंत्री देश को 31 दिसंबर, 2029 तक नशा मुक्त बनाने की घोषणा कर चुके हैं। ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ ने सही दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं, अब जरूरत इसकी निरंतरता बनाए रखने की है।