बस्तर दशहरा: यूनेस्को सूची में शामिल करने का संकल्प, 75 दिन तक रहेगी सांस्कृतिक विरासत की गूंज
विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा-2026 को भव्यता के साथ मनाने और इसे यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने की तैयारियों को गति दी गई है।
विस्तार
बस्तर सांसद एवं समिति अध्यक्ष महेश कश्यप की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों, दंतेवाड़ा से मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा, माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव, मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन तथा टेंपल स्टेट समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया। सांसद कश्यप ने बस्तर दशहरा को सामाजिक समरसता और अनूठी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई है। सांसद ने एनएमडीसी प्रबंधन से सीएसआर मद के अंतर्गत हर वर्ष कम से कम 1.5 करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय मदद दिलाने की मांग उठाने की बात कही। उन्होंने निर्देश दिया कि 75 दिनों के इस आयोजन के दौरान कोई भी समानांतर कार्यक्रम न किया जाए, जिससे पर्व की मूल परंपरा प्रभावित न हो।
माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1423 से निरंतर आयोजित हो रही यह परंपरा मैसूर तथा कुल्लू दशहरा से भी अधिक प्राचीन है। उन्होंने इस पर्व को यूनेस्को की विश्व सांस्कृतिक धरोहर सूची में दर्ज कराने का सामूहिक संकल्प दोहराया। उन्होंने मावली परघाव के स्थान और मार्ग की विशेष सफाई कराने तथा देवी-देवताओं व आंगा देव के सम्मानपूर्वक आगमन की व्यवस्था पर जोर दिया। उन्होंने मांझी-चालकी से पारंपरिक वेशभूषा और पगड़ी पहनने का अनुरोध किया।
बैठक के दौरान बस्तर दशहरा समिति के बलराम मांझी नए उपाध्यक्ष चुने गए। मांझी ने देवसराय समेत अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की व्यवस्थाएं सुधारने का सुझाव दिया। बैठक में कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा तथा जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना उपस्थित रहे।