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एक्सप्लेनर: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में कितने भारतवंशी मैदान में, ट्रंप-विपक्ष में किसकी ओर भारतीय मूल के लोग?

Tue, 03 Nov 2026 06:03 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026 में विवेक रामास्वामी, रो खन्ना समेत दर्जनों भारतवंशी मैदान में हैं। जानिए प्रमुख उम्मीदवार, उनके पद और भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का रुझान।
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अमेरिका में भारतीय वोटरों की आबादी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिका में मध्यावधि चुनाव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भारत के समय के हिसाब से आज शाम से अमेरिका के कुछ राज्यों में मतदान शुरू हो जाएगा। इसके अगले कुछ घंटों के अंदर ही पूरा अमेरिका अमेरिकी संसद के निचले सदन- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा के सभी 435 सदस्यों को चुनने के लिए वोट कर रहा होगा। इतना ही नहीं, करीब 36 राज्य अपने गवर्नर को चुनेंगे। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों के वोटर्स संसद के उच्च सदन- सीनेट की एक-तिहाई (35 सीटों) के लिए मतदान में हिस्सा लेंगे।
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अमेरिका के चुनाव में हर बार की तरह इस बार भी कई भारतवंशी नेता अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। गवर्नर से लेकर सांसदी और स्थानीय निकाय तक के लिए करीब 57 भारतीय-अमेरिकी नेता मुकाबले में रहेंगे। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका में इस बार कितने भारतीय मूल के नेता किन-किन पदों के लिए मुकाबले में हैं? निचले सदन से लेकर उच्च सदन और गवर्नर पद तक कौन-कौन से चेहरे मैदान में हैं? मध्यावधि चुनाव में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को लेकर भारतीय मूल के मतदाताओं का रुख क्या है? आइये जानते हैं...


अमेरिका में कितने भारतीय मूल के नेता किन-किन पदों के लिए मुकाबले में? 

अमेरिका में सबसे ज्यादा 36 नेता राज्यों और स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा 11 नेता संसद के निचले सदन- प्रतिनिधि सभा और एक नेता गवर्नर के पद के लिए उतरे हैं। इन सभी की किस्मत आज मतपेटी में कैद हो जाएगी। 

ये भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: क्या हैं अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनाव, ये क्यों अहम; ट्रंप की शक्तियों पर कैसे डालेंगे असर

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार। - फोटो : अमर उजाला

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स: निचले सदन के लिए कौन से भारतवंशी मैदान में?

अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए भारतीय मूल के कुल 11 नेता चुनाव मैदान में हैं। इनमें चार मौजूदा सांसद अपनी सीटें बरकरार रखने के लिए फिर लड़ रहे हैं, जबकि 7 नए प्रत्याशी मैदान में हैं। 

1. फिर चुनाव लड़ रहे मौजूदा सांसद

रो खन्ना: डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख सांसद हैं और कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट (सिलिकॉन वैली क्षेत्र) से दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं।

प्रमिला जयपाल: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला। वॉशिंगटन राज्य के 7वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से फिर डेमोक्रेट उम्मीदवार हैं।

अमी बेरा: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के वरिष्ठ सदस्य हैं और कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अपनी सीट बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।

सुहास सुब्रमण्यम: वर्जीनिया और ईस्ट कोस्ट से अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुने गए पहले भारतीय-अमेरिकी हैं और वे वर्जीनिया से डेमोक्रेटिक पार्टी के मौजूदा सांसद के रूप में दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं।

फिर सांसद बनने की दौड़ में चार सांसद। - फोटो : अमर उजाला

2. नए उम्मीदवार: चुनौती देने वाले व नए चेहरे


रितेश टंडन: भारतीय-अमेरिकी उद्यमी हैं, जो कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में अपने ही समुदाय के डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना के खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं।

नीरव सेठ: गुजरात में जन्मे नीरव अमेरिकी सेना में मरीन रह चुके हैं। वे वॉशिंगटन के 7वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में प्रमिला जयपाल के खिलाफ रिपब्लिकन प्रत्याशी हैं।

डॉ. अमीश शाह: आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ और एरिजोना के पूर्व राज्य प्रतिनिधि हैं। वे एरिजोना के फर्स्ट कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हैं।

पिया दांडिया: हाई स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल हैं और फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी के रूप में रिपब्लिकन उम्मीदवार कैसी अस्सार को चुनौती दे रही हैं।

महेश गनोरकर: नॉर्थ कैरोलिना के चौथे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं।

संदीप दीक्षित: ओहायो के 13वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।

अनिल कुमार: मिशिगन के 11वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार। - फोटो : अमर उजाला

गवर्नर: राज्य के मुखिया के लिए भी भारतवंशी मैदान में

  • इन मध्यावधि चुनावों में गवर्नर पद के लिए भारतीय मूल के प्रमुख नेता विवेक रामास्वामी चुनाव मैदान में हैं।
  • वे ओहायो के गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। वे रिपब्लिकन पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार हैं।
  • रामास्वामी इस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी एमी एक्टन को चुनौती दे रहे हैं। 
  • उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिला है। उन्होंने मई 2026 में रिपब्लिकन का अंदरूनी चुनाव जीता था।

अगर विवेक रामास्वामी यह चुनाव जीतते हैं, तो वे अमेरिकी इतिहास में भारतीय विरासत वाले तीसरे गवर्नर होंगे। उनसे पहले अमेरिका में सिर्फ बॉबी जिंदल और निक्की हेली ही भारतवंशी गवर्नर रही हैं। वे किसी अमेरिकी राज्य के पहले हिंदू गवर्नर भी बन सकते हैं।


लेफ्टिनेंट गवर्नर: भारतीय मूल की नेता पद बचाने को मैदान में

गवर्नर के अलावा, कार्यकारी नेतृत्व के स्तर पर अरुणा मिलर मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में दोबारा चुनाव मैदान में हैं। हैदराबाद में जन्मी अरुणा मिलर मौजूदा समय में अमेरिका में किसी भी भारतीय मूल के नेता को मिले शीर्ष कार्यकारी पदों में से एक पर काबिज हैं।

ये भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से क्या बदलेगा, रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए क्या दांव पर?
 

राज्यों के प्रतिनिधि सभा और सीनेट में कौन से अहम चेहरे मैदान में?

अमेरिका में इस मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी राज्यों की विधायिकाओं- राज्य सीनेट और राज्य प्रतिनिधि सभा के लिए भारतीय मूल के कई प्रमुख चेहरे चुनावी मुकाबले में हैं।

1. राज्य सीनेट के लिए मुकाबले में प्रमुख चेहरे

प्रिया सुंदरेशन
  • वे एरिजोना स्टेट सीनेट के लिए दोबारा चुनाव मैदान में हैं। वर्तमान में वे 30 सदस्यीय एरिजोना सीनेट में विपक्ष की नेता के पद पर हैं। 
  • अगर डेमोक्रेटिक पार्टी राज्य विधायिका में बहुमत हासिल करते हैं, तो प्रिया सुंदरेशन सीनेट की अध्यक्ष बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं।

लिसा कौल 
भारत की राजधानी दिल्ली में पढ़ीं लिसा कौल न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट की सीट के लिए चुनाव लड़ रही हैं।
 

2. राज्य प्रतिनिधि सभा के प्रमुख चेहरे

रणजीव पुरी
वे मिशिगन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मौजूदा सदस्य और सदन में विपक्ष के नेता हैं। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी मिशिगन हाउस में नियंत्रण हासिल करती है, तो रणजीव पुरी सदन के पहले भारतीय-अमेरिकी अध्यक्ष बन सकते हैं।

पूजा सेठी
पूर्व इमिग्रेशन अटॉर्नी और ट्रैविस काउंटी डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्व प्रमुख पूजा सेठी टेक्सास में प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हैं। इस सीट पर उनका सीधा मुकाबला रिपब्लिकन प्रत्याशी जेनिफर मुश्टालर से है।

संदीप श्रीवास्तव
व्यवसायी और सामुदायिक कार्यकर्ता संदीप श्रीवास्तव टेक्सास हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में प्लानो-फ्रिस्को क्षेत्र से डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी हैं। वे इस सीट पर पिछले पांच कार्यकालों से काबिज रिपब्लिकन विधायक को चुनौती दे रहे हैं।
 

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

मेयर और राज्यों के अटॉर्नी जनरल पद पर कौन से भारतवंशी मुकाबले में?

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में भारतीय मूल के नेताओं की उपस्थिति केवल संसद और राज्य की विधानसभाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि मेयर (महापौर) और राज्यों के अटॉर्नी जनरल (राज्य के शीर्ष कानून अधिकारी) जैसे अहम प्रशासनिक और कानूनी पदों पर भी भारतवंशियों की मजबूत चुनौती देखने को मिल रही है।

1. मेयर पद के लिए मुकाबला

नित्या रमन:  लॉस एंजिल्स 
नित्या रमन अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर लॉस एंजेलिस के मेयर पद की चुनावी दौड़ में मुख्य दावेदार हैं। वे एक अर्बन प्लानर (शहरी योजनाकार) हैं और 2020 में लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल के लिए चुनी गई पहली दक्षिण एशियाई और पहली एशियाई-अमेरिकी महिला बनी थीं। मार्च 2024 में उन्होंने मेयर का दूसरा कार्यकाल जीता था। उनका यह मुकाबला भारतीय-अमेरिकी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कांग्रेस और राज्य विधानसभाओं से आगे ले जाकर देश के एक शीर्ष महानगरीय नेतृत्व के केंद्र में स्थापित करता है।

2. राज्यों के अटॉर्नी जनरल पद पर चुनौती

सरिता कोमातिरेड्डी: न्यूयॉर्क 
  • वे न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला मौजूदा डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स से है। सरिता को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिला है। 
  • वे एक दशक से अधिक समय तक अल-कायदा, आईएसआईएस और मैक्सिकन ड्रग कार्टेल से जुड़े गंभीर मामलों पर काम कर चुकी हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा व साइबर क्राइम मामलों में वरिष्ठ अभियोजक रही हैं।

जोश कौल: विस्कॉन्सिन 
जोश कॉल डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से विस्कॉन्सिन के अटॉर्नी जनरल के रूप में दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं और अपने पद को बरकरार रखने के लिए मैदान में हैं।


अब जानें- किस तरफ जा सकता है भारतवंशियों का रुझान?

कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और यूगोव (YouGov) की ओर से जारी 'इंडियन अमेरिकन एटीट्यूड्स सर्वे' (आईएएएस)  के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस बार भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का भारी रुझान डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर जाता दिख रहा है। 


1. मतदान प्राथमिकताओं में डेमोक्रेट्स को भारी बढ़त

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स: भारतीय-अमेरिकी नागरिकों में से 62% का झुकाव डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की ओर है, जबकि केवल 19% मतदाता रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे हैं। इस तरह डेमोक्रेट्स को 43 अंकों की विशाल बढ़त हासिल है।

उच्च सदन में: जिन राज्यों में सीनेट के चुनाव हो रहे हैं, वहां 63% भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट्स के साथ हैं, जबकि 21% रिपब्लिकन्स के पक्ष में हैं।

अनिर्णीत मतदाता: लगभग 12% मतदाता अभी भी अनिर्णीत हैं और 5% ने मतदान न करने की बात कही है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

2. 2024 में रिपब्लिकन पार्टी को मिले फायदे में गिरावट

  • 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को 30% भारतीय-अमेरिकियों का समर्थन मिला था, जिससे दोनों दलों के बीच का अंतर काफी कम हो गया था।
  • हालांकि, मध्यावधि चुनावों में यह रुझान टिक नहीं पाया और कांग्रेसनल स्तर पर रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन गिरकर 19% पर आ गया है, जबकि डेमोक्रेट्स का समर्थन फिर से अपने पुराने 62% के स्तर पर पहुंच गया है।


3. उम्र और लिंग के आधार पर रुझान

40 वर्ष और उससे अधिक उम्र के पुरुष: इस वर्ग में सबसे बड़ा बदलाव देखा गया है। जनवरी 2026 में जहां 53% पुरुष डेमोक्रेट्स के साथ थे, वहीं अक्तूबर 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 68% हो गया, जबकि रिपब्लिकन्स का समर्थन 32% से घटकर 16% रह गया। 18 से 39 वर्ष के युवा पुरुष: युवा पुरुषों में 64% डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में हैं, जबकि 23% रिपब्लिकन्स के साथ हैं।

महिला मतदाता: 18 से 39 वर्ष की 58% महिलाएं डेमोक्रेट्स और 21% रिपब्लिकन्स का समर्थन कर रही हैं। 40 से अधिक उम्र की महिलाओं में भी 58% डेमोक्रेट्स और 16% रिपब्लिकन्स के पक्ष में हैं।
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अमेरिका मध्यावधि चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

4. रिपब्लिकन्स से मोहभंग और डेमोक्रेट्स पसंद, वजह क्या?

  • सर्वेक्षण के अनुसार, यह बदलाव मुख्य रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की नीतियों, खासकर आव्रजन, घरेलू अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और भारत-अमेरिका संबंध से उपजी निराशा और नाराजगी के कारण है।
  • डेमोक्रेट्स को वोट देने का इरादा रखने वाले मतदाताओं में से 35%का कहना है कि वे डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन से ज्यादा रिपब्लिकन पार्टी और ट्रंप के विरोध के चलते उन्हें वोट दे रहे हैं।
  • सर्वेक्षण में केवल 46% भारतवंशियों ने खुद को आधिकारिक रूप से डेमोक्रेट और 19% ने रिपब्लिकन बताया, जबकि 26% खुद को निर्दलीय मानते हैं। इसके बावजूद 62% लोग डेमोक्रेट्स को वोट देने की योजना बना रहे हैं, जिससे साफ है कि डेमोक्रेटिक पार्टी को अपनी मूल पार्टी पहचान से बाहर के स्वतंत्र मतदाताओं का भी समर्थन मिल रहा है।

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