फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Explainer: What Will the US Midterm Elections Change? What's at Stake for Republicans and Democrats?

एक्सप्लेनर: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से क्या बदलेगा, रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए क्या दांव पर?

Tue, 03 Nov 2026 09:36 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Tue, 03 Nov 2026 09:36 AM IST
विज्ञापन
सार
Register For Event

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव तय करेंगे कि राष्ट्रपति ट्रंप की ताकत बढ़ेगी या घटेगी। क्या रिपब्लिकन अपना किला बचा पाएंगे या डेमोक्रेट्स संसद का गणित बदल देंगे? महंगाई से लेकर टैरिफ तक, इस बार कई मुद्दे चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।

loader
Explainer: What Will the US Midterm Elections Change? What's at Stake for Republicans and Democrats?
अमेरिका मध्यावधि चुनाव - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने जा रहे हैं। इसे लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इन चुनावों में करीब 21 करोड़ रजिस्टर्ड मतदाता वोट डालने के पात्र हैं। इनका फैसला तय करेगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी संसद में अपना बहुमत बरकरार रख पाती है या विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को सत्ता के फैसलों में ज्यादा दखल देने का मौका मिलता है।



ऐसे में सवाल है कि राष्ट्रपति चुनाव से अलग अमेरिका में मध्यावधि चुनाव क्यों होते हैं? इनमें किन पदों के लिए मतदान किया जाता है और इनका नतीजा राष्ट्रपति की ताकत को किस तरह प्रभावित करता है? इस बार रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए ये चुनाव इतने अहम क्यों हैं? चुनाव में किन-किन चीजों और मुद्दों की चर्चा तेज है? इस बार के चुनाव में कितना दान दिया गया? पिछले चुनाव के क्या नतीजे रहे हैं?

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से इतर मध्यावधि चुनाव क्यों होते हैं? 

अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव हर चार साल में आयोजित किया जाता है। दूसरी तरफ राष्ट्रपति के कार्यकाल के ठीक आधे रास्ते यानी दो वर्ष बाद भी चुनाव कराए जाते हैं, जिन्हें मध्यावधि चुनाव कहा जाता है। 

मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति पद के लिए नहीं, बल्कि अमेरिकी संसद- कांग्रेस के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन) और सीनेट (उच्च सदन) का नियंत्रण तय करने के लिए होते हैं।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

1. सांसदों के कार्यकाल और चुनावी चक्र में अंतर के लिए
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन): इसके सभी 435 सदस्यों का कार्यकाल केवल दो साल का होता है। इसलिए, राष्ट्रपति चुनाव के साथ-साथ राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में भी सभी सीटों पर फिर से चुनाव होते हैं। 

सीनेट (उच्च सदन): 100 सीट वाली सीनेट में सांसदों (सीनेटरों) का कार्यकाल छह वर्ष का होता है, लेकिन इनके चुनाव चरणबद्ध होते हैं। हर दो साल में सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों- 35 पर चुनाव कराए जाते हैं। यानी 35 सीटों पर अभी और 35 सीटों पर राष्ट्रपति चुनाव के साथ।

गवर्नर और स्थानीय चुनाव: अमेरिकी संसद के अलावा अमेरिका के 50 राज्यों में से 36 राज्यों में गवर्नर, राज्य विधायिकाओं और स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों का चुनाव भी मध्यावधि चुनाव का हिस्सा होते हैं।

2. शक्तियों का संतुलन और विधायी नियंत्रण
अमेरिकी व्यवस्था में संसद (कांग्रेस) देश के लिए कानून बनाती है, संघीय बजट और खर्च को नियंत्रित करती है और राष्ट्रपति की कार्यशैली पर निगरानी रखती है।
मध्यावधि चुनाव जनता को यह मौका देते हैं कि वे तय करें कि संसद के किस सदन पर किस राजनीतिक दल का बहुमत रहेगा। 

इससे यह निर्धारित होता है कि राष्ट्रपति के पास अपने बचे हुए दो वर्षों के कार्यकाल में नीतियां, कानून और बजट पास कराने की कितनी स्वतंत्रता या चुनौती होगी। 
अगर विपक्षी दल किसी भी सदन में बहुमत हासिल कर लेता है, तो वह राष्ट्रपति के विधायी एजेंडे को बाधित कर सकता है और प्रशासन की जांच शुरू कर सकता है।

अमेरिकी संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और उच्च सदन और उच्च सदन (सीनेट) का मौजूदा हाल।
अमेरिकी संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और उच्च सदन और उच्च सदन (सीनेट) का मौजूदा हाल। - फोटो : अमर उजाला

3. राष्ट्रपति के प्रदर्शन पर जनमत संग्रह 
मध्यावधि चुनाव को सत्तारूढ़ राष्ट्रपति के शुरुआती दो वर्षों के कामकाज और नीतियों पर जनता का एक जनमत संग्रह भी माना जाता है।

रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए चुनाव में क्या दांव पर?

1. रिपब्लिकन पार्टी के लिए
रिपब्लिकन पार्टी को दो साल पहले न सिर्फ राष्ट्रपति चुनाव में जीत मिली थी, बल्कि संसद के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में भी मामूली बहुमत मिल गया था। चूंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (कार्यकारिणी) के फैसलों को संसद (विधायिका) से मंजूरी की जरूरत होती है, इसलिए रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत ट्रंप के निर्णयों को लागू करने में अहम साबित हो रहा था। 

अगर रिपब्लिकन पार्टी किसी भी एक सदन में बहुमत खो देती है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के घरेलू विधायी एजेंडे, आर्थिक नीतियों और बजट प्रस्तावों पर ब्रेक लग सकता है। 
संसद पर नियंत्रण रहने की वजह से रिपब्लिकन ट्रंप प्रशासन के खिलाफ डेमोक्रेट्स की ओर से संसदीय जांचों, समन और महाभियोग की कोशिशों को रोक सकती है।
सीनेट में बहुमत से रिपब्लिकन पार्टी राष्ट्रपति की ओर से नामित संघीय जजों, सुप्रीम कोर्ट के जजों, कैबिनेट मंत्रियों और राजदूतों की नियुक्ति आसानी से करा सकती है।

2. डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए दांव पर
डेमोक्रेट्स को संसद के निचले सदन में बहुमत के लिए कम से कम तीन सीटों और सीनेट में चार सीटों की बढ़त की जरूरत है। किसी भी एक सदन पर नियंत्रण मिलने से डेमोक्रेट्स के पास राष्ट्रपति ट्रंप के कानूनों और बजटीय आवंटन को रोकने की सीधी शक्ति आ जाएगी।
समितियों का नियंत्रण मिलने पर डेमोक्रेट्स के पास ट्रंप प्रशासन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों और सरकारी नीतियों की गहन जांच करने, गवाहों को बुलाने और दस्तावेज तलब करने का कानूनी अधिकार आ जाएगा।
सिर्फ हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के पास राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने का अधिकार होता है, जो डेमोक्रेटिक पार्टी को सदन में बहुमत मिलने पर ही मुमकिन हो सकता है। 
वहीं, अगर डेमोक्रेटिक पार्टी को सीनेट का नियंत्रण भी मिल जाता है तो वे राष्ट्रपति की ओर से की जाने वाली न्यायिक-प्रशासनिक नियुक्तियों को खारिज कर सकते हैं और अन्य शक्तियों को भी सीमित कर सकते हैं।

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव।
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में किस पार्टी को कितना चंदा मिला?

द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के मध्यावधि चुनाव में अब तक 50 सबसे बड़े व्यक्तिगत दानदाताओं और संगठनों ने कुल 2.77 अरब डॉलर का योगदान दिया है। इनमें ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करने वाले दानदाताओं और संगठनों ने 1.67 अरब डॉलर दिए हैं। यह कुल चंदे का करीब 60 फीसदी है।

वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करने वाले दानदाताओं ने 83.2 करोड़ डॉलर का योगदान दिया है। यह कुल चंदे का करीब 30 फीसदी है। इस तरह रिपब्लिकन समर्थक दानदाताओं का योगदान डेमोक्रेटिक समर्थकों से लगभग दोगुना रहा है।

बाकी 26.4 करोड़ डॉलर यानी करीब 10 फीसदी चंदा ऐसे दानदाताओं और संगठनों से आया है, जो दोनों पार्टियों या विशेष हितों का समर्थन करते हैं। इनमें खेलों पर सट्टेबाजी और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े समूह भी शामिल हैं। 

वहीं अमेरिकी संघीय चुनाव आयोग (एफईसी) के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के चुनाव में एलन मस्क सबसे बड़े व्यक्तिगत दानदाता हैं। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और टेस्ला व स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने 44.6 करोड़ डॉलर का योगदान दिया है। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े संगठनों का समर्थन किया है।

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव।
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

चुनाव में और किन-किन चीजों की हो रही चर्चा?

अमेरिका की राजनीति में उम्र बना बड़ा मुद्दा
अमेरिकी राजनीति में बुजुर्ग नेताओं का दबदबा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। 88 साल के रिपब्लिकन सांसद हैल रोजर्स 1981 से केंटकी के 5वें निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अब 24वीं बार प्रतिनिधि सभा का चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, 93 साल के सीनेटर चक ग्रासली भी सक्रिय राजनीति में हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उम्र 80 साल है, जबकि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन ने जब पद छोड़ा तब वे 82 साल के थे। पूर्व प्रतिनिधि सभा अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने भी 82 साल की उम्र में डेमोक्रेटिक पार्टी के संसदीय नेता का पद छोड़ा था। 

अमेरिका में ऐसी शासन व्यवस्था को वृद्धतंत्र कहा जा रहा है, यानी ऐसी व्यवस्था जिसमें सत्ता पर बुजुर्ग नेताओं का दबदबा हो। दूसरी ओर, अमेरिका की संसद में 45 साल से कम उम्र के सांसदों की हिस्सेदारी अन्य लोकतांत्रिक देशों के मुकाबले काफी कम है। प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, मौजूदा संसद के गठन के समय प्रतिनिधि सभा के सदस्यों की औसत उम्र 58 साल और सीनेटरों की 65 साल थी, जबकि अमेरिका के आम नागरिकों की औसत उम्र 39 साल है। इसी वजह से नेताओं की उम्र, स्वास्थ्य और राजनीति में युवाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलने को लेकर बहस तेज हो रही है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव - फोटो : Amar Ujala

महंगाई और खर्च से परेशान अमेरिकी मतदाता
मध्यावधि चुनाव में महंगाई और अर्थव्यवस्था बड़े मुद्दे बने हुए हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी लोग रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतों और खर्चों से परेशान हैं। कई मतदाता इसके लिए राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीतियों और ईरान के साथ युद्ध को जिम्मेदार मान रहे हैं। हालांकि, सितंबर में अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.2 फीसदी रही और पिछले क्वार्टर में अर्थव्यवस्था 3.4 फीसदी की दर से बढ़ी। इसके बावजूद आम लोगों को आर्थिक स्थिति में राहत महसूस नहीं हो रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 से अब तक अमेरिका में चीजों की कीमतें करीब 5.5 फीसदी बढ़ी हैं। इसी दौरान कर्मचारियों की औसत प्रति घंटे की कमाई में भी 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यानी लोगों की कमाई बढ़ी, लेकिन महंगाई के कारण खर्च भी उसी हिसाब से बढ़ गया। इसके अलावा, घर खरीदने के लिए 30 साल के होम लोन पर ब्याज दर 7 फीसदी से ऊपर है। घरों की कमी से उनकी कीमतें भी बढ़ी हुई हैं। ऐसे में महंगाई और आर्थिक परेशानियां मिडटर्म चुनाव में ट्रंप सरकार के लिए चुनौती बन सकती हैं। 

निर्दलीय मतदाता और उम्मीदवार बदल सकते हैं चुनावी समीकरण
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के मिडटर्म चुनावों में उन मतदातओं की भूमिका अहम हो सकती है जो दोनों प्रमुख दलों में से किसी भी तरफ झुकाव नहीं रखते। प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे के अनुसार, अमेरिका के 44 फीसदी वयस्क खुद को किसी दल से जुड़ा नहीं मानते हैं। हालांकि, इनमें से ज्यादातर का झुकाव डेमोक्रेटिक या रिपब्लिकन पार्टी की ओर रहता है। ऐसे मतदाता जो किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं करते, कुल मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी करीब 7 से 10 फीसदी है।

मैरिस्ट पोल के मुताबिक, 2026 के चुनावों में वोट डालने की संभावना रखने वाले ऐसे मतदाताओं में 52 फीसदी डेमोक्रेटिक और 39 फीसदी रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, 28 फीसदी बदलाव के लिए वोट देने की बात कह रहे हैं। इसके अलावा, नेब्रास्का और मोंटाना में निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी भी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है। इन राज्यों में उनके कारण बड़ी पार्टियों के वोटों का समीकरण बदल सकता है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव - फोटो : Amar Ujala

पिछले मध्यावधि चुनावों में क्या हुआ था?

अमेरिका के पिछले मध्यावधि चुनावों का इतिहास बताता है कि इन चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2010 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा की डेमोक्रेटिक पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। उस समय देश की अर्थव्यवस्था कमजोर थी और ओबामा की हेल्थकेयर योजना को भी लोगों का कम समर्थन मिल रहा था। इसका फायदा रिपब्लिकन पार्टी को मिला और उसने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 63 अतिरिक्त सीटें जीत लीं। इससे डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत खत्म हो गया। हालांकि, सीनेट में छह सीटें गंवाने के बावजूद डेमोक्रेट्स अपना नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहे।

वहीं, 2018 के मध्यावधि चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति थे। उस समय डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 40 अतिरिक्त सीटें जीतीं और बहुमत हासिल किया। हालांकि, सीनेट में उसे दो सीटों का नुकसान हुआ।

2026 के चुनावों में भी 50 में से 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए चुनाव हो रहे हैं। इसके अलावा, लगभग सभी राज्यों में राज्य की विधानसभाओं की सीटों के लिए भी मतदान होना है। आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल अमेरिका की राज्य विधानसभाओं की 55 फीसदी सीटों पर रिपब्लिकन पार्टी और 43.8 फीसदी सीटों पर डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed