10 सितंबर 2025 को यूटा वैली यूनिवर्सिटी में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान चार्ली किर्क की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वो अमेरिकी राजनीति में उभरते हुए सितारा थे। उनको अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीबी माना जाता था और अमेरिकी राइट विंग के प्रमुख नेता और टर्निंग पॉइंट यूएसए के मुखिया थे। किर्क जब आउटडोर इवेंट में हिस्सा ले रहे, जब उनको एक शख्स ने गोली मारी थी।
गोलीकांड की वीडियो पर रोक की मांग
रूढ़िवादी कार्यकर्ता चार्ली किर्क की हत्या के ग्राफिक वीडियो, जो कि यूनिवर्सिटी परिसर में उनकी रैली के दौरान बनाए गए थे। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए और लाखों लोगों ने उन्हें देखा। अब इस मामले में आरोपी व्यक्ति के वकीलों ने राज्य के एक न्यायाधीश से मांग की है कि मंगलवार (03 फरवरी) को होने वाली सुनवाई में ऐसे वीडियो दिखाने पर रोक लगाई जाए।
दरअसल, बचाव पक्ष ने कोर्टरूम में टीवी और फोटोग्राफी कैमरों को भी बाहर रखने की अपील की है। उनका कहना है कि 'अत्यधिक पक्षपाती' मीडिया कवरेज से मामले पर असर पड़ सकता है और निष्पक्ष सुनवाई बाधित हो सकती है। हालांकि अभियोजकों और मीडिया संस्थानों के वकीलों ने जिला न्यायाधीश टोनी ग्राफ से कार्यवाही खुली रखने की मांग की है।
इधर, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव पक्ष की चिंता वाजिब है। कॉर्नेल लॉ स्कूल की प्रोफेसर वैलेरी हैंस के अनुसार हाई-प्रोफाइल मामलों में मीडिया कवरेज संभावित जूरी सदस्यों को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा, 'जब जूरी पहले से ही मीडिया से मिली जानकारी लेकर अदालत में आती है, तो वह अदालत में पेश किए गए सबूतों को उसी नजरिए से देखने लगती है।
आरोपी टायलर रॉबिन्सन के खिलाफ कड़ी सजा की मांग
बता दें कि अभियोजक 22 वर्षीय आरोपी टायलर रॉबिन्सन के खिलाफ मौत की सजा की मांग कर रहे हैं। उस पर 10 सितंबर 2025 को ओरेम स्थित यूटा वैली यूनिवर्सिटी परिसर में चार्ली किर्क की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। इस रैली में करीब 3,000 लोग मौजूद थे। किर्क ‘टर्निंग पॉइंट यूएसए’ के सह-संस्थापक थे और उन्होंने युवाओं को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में वोट देने के लिए प्रेरित किया था।
दरअलस, मृत्युदंड पाने के लिए अभियोजकों को यह साबित करना होगा कि अपराध 'विशेष रूप से क्रूर या जघन्य' था। इसी संदर्भ में ग्राफिक वीडियो अहम भूमिका निभा सकते हैं।
प्रोफेसर हैंस ने कहा, 'ऐसे वीडियो देखने के बाद लोग सोच सकते हैं कि यह अपराध वाकई बेहद क्रूर था।' बचाव पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ मीडिया संस्थान अदालत में आरोपी और उसके वकीलों के बीच की बातचीत को 'लिप रीडिंग' के जरिए समझने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले 16 जनवरी की सुनवाई में एक टीवी कैमरा ऑपरेटर द्वारा आरोपी के चेहरे पर जूम करने पर न्यायाधीश को हस्तक्षेप करना पड़ा और आगे की रिकॉर्डिंग रोक दी गई।
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गोलीकांड के वीडियो में क्या है?
बचाव पक्ष ने अदालत में कहा, 'मीडिया अब सच्चाई दिखाने के बजाय इस मामले से मुनाफा कमाने वाला निवेशक बन गया है।' वहीं अभियोजकों का कहना है कि जनता की रुचि के कारण अदालत की पारदर्शिता कम नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यह मामला सार्वजनिक रहेगा और इसे खुली कार्यवाही के साथ ही चलाया जाना चाहिए। अभियोजन पक्ष के अनुसार एक वीडियो में गोली लगते हुए, किर्क की गर्दन से खून निकलते और उन्हें कुर्सी से गिरते हुए स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
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