शाहजहांपुर में वरिष्ठ साहित्यकार ओमप्रकाश कश्यप ने बच्चों को साहित्य से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों में पढ़ने की आदत और बाल साहित्य के प्रति रुचि विकसित करने के लिए परिवार और समाज दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अभिभावक बच्चों को किताबों के बजाय केवल मोबाइल फोन उपलब्ध कराएंगे तो उनका परिचय बाल साहित्य से नहीं हो पाएगा। सोमवार को संतराम बीए स्मृति सम्मान समारोह में शामिल होने आए ओमप्रकाश कश्यप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बच्चे कहानियां पढ़ना पसंद करते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य उपलब्ध कराना होगा। वर्तमान समय में बच्चों का रुझान पुस्तकों और कॉमिक्स से हटकर कार्टून और डिजिटल माध्यमों की ओर बढ़ गया है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि वहां उन्हें एक साथ दृश्य, कहानी और नाटकीय प्रस्तुति देखने को मिल जाती है। कहा कि बच्चों को साहित्य की ओर आकर्षित करने के लिए अभिभावकों को समय देना होगा। उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा और किताबों के महत्व को समझाना होगा। तभी बच्चों में पढ़ने की संस्कृति विकसित हो सकेगी। उन्होंने ने कहा कि बच्चे का लगभग 50 प्रतिशत व्यवहार और सोच उसके सामाजिक परिवेश से प्रभावित होती है। समाज में हिंसा, तनाव और नकारात्मकता का माहौल अधिक होगा तो उसका प्रभाव बच्चों पर भी पड़ेगा।