शहर के श्री पिंजरापोल गौशाला परिसर में शिव कैलाश परिवार की तरफ से आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन कथा वाचक रुद्राक्ष और बेल वृक्ष के महत्व की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि यह दोनों वृक्ष मोक्ष और पुण्य के प्रतीक हैं। कथा वाचक प्रद्युम्न कृष्ण महाराज ने कहा कि रुद्राक्ष का वृक्ष महादेव के अश्रु से उत्पन्न हुआ है। यह अत्यंत ही पवित्र और मंगलकारी है। शिवपूजन में प्रत्येक शिव भक्त को रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। रुद्राक्ष स्वयं शिव स्वरूप है। उन्होंने कहा कि बेल वृक्ष के महात्म की कथा सुनाते हुए कहा कि बेल वृक्ष की जड़ में महादेव, तने में महेश्वरी, पत्तियों में पार्वती और फूलों में गौरी का वास जाता है। बेल पत्र के तीन पत्तों (बेलपत्र) का समूह भगवान शिव के त्रिशूल या त्रिनेत्र का प्रतीक है, जो अत्यंत प्रिय हैं।