आगरा नगरीय क्षेत्र में रहने वाले वृद्धों के लिए अनपढ़ता नई परेशानी बन गई है। कोई शैक्षणिक दस्तावेज न होने के कारण बदले नियमों ने उन्हें वृद्धावस्था पेंशन योजना का पात्र होते हुए भी अपात्र बना दिया है, क्योंकि खुद को वृद्ध साबित करने के लिए शैक्षणिक प्रमाणपत्र या परिवार रजिस्टर की कॉपी में एक होना अनिवार्य है। शहर में परिवार रजिस्टर होती नहीं है। 60 साल की उम्र पार करने वाले अधिकतर बुजुर्ग पढ़े नहीं हैं। जनपद में करीब 7 हजार से अधिक लोगों की पेंशन प्रक्रिया आगे बढ़ने से रुक गई है। एक तरह से नए नियमों ने उनसे पेंशन के मौके को छीन लिया है। जनपद में पिछले दो सालों में करीब 20 हजार लोगों ने वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन किए है। उनमें नगरी क्षेत्र में रहने वालों की संख्या करीब सात हजार है। 21 मार्च को आए नए शासनादेश के बाद आधार कार्ड से जन्मतिथि की गणना को अमान्य कर दिया है। इसके लिए उन्हें दो विकल्प दिए गए है, जिनमें शैक्षणिक प्रमाण पत्र (जिसमें जन्मतिथि हो) या फिर परिवार व कुटुंब रजिस्टर की सत्यापित प्रति होनी चाहिए। पिछले दो सालों में आवेदन करने वालों के लॉग इन को आवेदकों के लिए फिर से खोल दिया है। अब उन्हें नए नियमों के अनुसार पेंशन लाभ लेने के लिए फिर से आवेदन को पूर्ण करना है। उसमें शैक्षणिक प्रमाण पत्र की कॉपी या परिवार रजिस्टर की कॉपी अपलोड करनी है। इसके बाद ही योजना के लाभ की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। वृद्ध बोले नियम में हो परिवर्तनपिछले दो सालों में आवेदन करने वाले दस लोगों से बात की। उनमें खुद को एक ने भी पढ़ा लिखा नहीं बताया। वह बोले इस नियम ने तो हमसे पेंशन छीन ही ली है। इसमें परिवर्तन होने चाहिए। उनमें से बल्केश्वर की कमलेश देवी ने बताया कि एक साल पहले आवेदन किया था, लेकिन अभी तक पेंशन नहीं आई। विभाग मार्कशीट अपलोड करने की कह रहा है। वह पढ़ी नहीं है। नगर निगम से परिवार रजिस्टर होने का भी मना कर दिया। विभाग ऐसे नियम लाया है इनसे पेंशन तो कभी मिलेगी ही नहीं। इन्हें बदलना चाहिए। कमला नगर निवासी विनोद ने बताया कि एक साल से ज्यादा हो गया आवेदन करे। दो लोग घर पर आकर सत्यापन भी कर गए थे, लेकिन पेंशन नहीं आई। अब समाज कल्याण विभाग जाकर पूछा तो उन्होंने मार्कशीट या फिर परिवार रजिस्टर की प्रति अपलोड करने को कहा है। उनके पास दोनों में से कोई नहीं है। इन नए नियमों को बदलना चाहिए।