चोट से दांत टूट गए हों या फिर हल्के टेढ़े-मेढ़े हों तो उन्हें घंटे भर में ही ठीक किया जा सकता है। आपकी मुस्कुराहट और खूबसूरत हो जाएगी। पहले की तरह दांतों की कटाई कर कैप लगाने की जरूरत नहीं है। शनिवार को एमजी रोड स्थित होटल में आयोजित दो दिवसीय एंडोडोंटिक्स एक्सीलेंस फाउंडेशन की कार्यशाला में डॉक्टरों ने व्याख्यान में ये जानकारी दी। मुख्य वक्ता अमेरिकन एकेडमी ऑफ कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री के अध्यक्ष डॉ. मोहन भुवनेश्वरन ने बताया कि लेजर कंपोजिट फिलिंग ट्रीटमेंट से टूटे हुए दांतों को आसानी से पहले जैसा बनाया जा सकता है। इसमें लेजर से कैविटी साफ कर दांत के रंग जैसा कंपोजिट मटीरियल (रेजिन) भरते हैं। इससे मरीज को दर्द नहीं होता और संक्रमण का खतरा भी नहीं है। पहले टूटे हुए दांत को काट-छांटकर कैप लगाते थे। इससे मुस्कुराहट प्रभावित होती थी। अब घंटे भर में प्रक्रिया पूरी हो जाती है। गंभीर स्थिति में मरीज को दो से तीन दिन डॉक्टर के पास आना पड़ता है। आगरा ब्रांच के अध्यक्ष डॉ. आशीष गुप्ता, डॉ. असीम शिरोमणि और डॉ. भरत चौहान ने बताया कि शहर में लेजर तकनीक से 3-15 हजार रुपये तक का खर्च आता है। मॉडलिंग करने वालों समेत युवक-युवती अधिक आते हैं। कार्यशाला में डॉ. एसके कठारिया, डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव, डॉ. सुष्मा प्रतिहार, डॉ. जया पंबू, डॉ. अमित नारायण, डॉ. चकित माहेश्वरी, डॉ. दीपक कुरुप, डॉ. पुनीत श्रीवास्तव, डॉ. श्रेय मल्होत्रा, डॉ. विपुल अरोड़ा, डॉ. वैभव कृष्णा, डॉ. जाह्नवी पटनी, डॉ. अभिषेक भार्गव आदि मौजूद रहे। कार्यशाला के मुख्य अतिथि केजीएमयू के दंत रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एपी टिक्कू ने बताया कि चॉकलेट, फास्टफूड खाने और रात को दूध पीकर सोने से बच्चों के दांत तेजी से खराब हो रहे हैं। तीन साल के बच्चे के दांतों में भी संक्रमण मिल रहा है। 65-70 फीसदी बच्चों के दांतों में परेशानी मिल रही है। इससे पक्के दांतों की बनावट भी बिगड़ रही है।