जयवीर सिंह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की स्थापना 13 नवंबर 1965 को हुई थी। पिछले 63 वर्षों से अकादमी संगीत, नृत्य, नाटक, लोकसंगीत और लोकनाट्य परंपराओं के प्रचार-प्रसार, संरक्षण, संवर्धन और प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नवोदित बाल, किशोर और युवा कलाकारों की खोज के लिए शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। नाट्य गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए संभागीय, प्रादेशिक और राज्य स्तरीय नाट्य समारोहों के साथ लोकनाट्य उत्सव भी आयोजित किए जाते हैं। जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से प्रदेश के सभी 75 जनपदों में शास्त्रीय गायन, वादन, कथक, लोकगीत, लोकनृत्य और नाटक जैसी विधाओं की कार्यशालाएं नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं। नवांकुर योजना के तहत प्रतिभाशाली कलाकारों को मंच उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि अकादमी वर्ष 1977 से त्रैमासिक पत्रिका ‘छायानट’ का प्रकाशन कर रही है और अब तक इसके 168 अंक प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 1970 से शुरू हुए अकादमी पुरस्कारों के अंतर्गत अब तक लगभग 510 कलाकार सम्मानित किए जा चुके हैं। मंत्री ने घोषणा की कि अकादमी सम्मान समारोह 2026 में वर्ष 2021-22, 2023 और 2024 के लिए अकादमी पुरस्कार, सफदर हाशमी पुरस्कार तथा बी.एम. शाह पुरस्कार के तहत कुल 51 कलाकारों को सम्मानित किया जाएगा।