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Union Budget 2026: 9वां बजट पेश, 2014 से अबतक क्या रहा अहम फैसला? Amar Ujala | highlights

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Sun, 01 Feb 2026 01:38 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आज अपने तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट पेश करने जा रही है। इस बार देश को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से कई अहम एलानों की उम्मीद है। खासकर दुनिया के लगातार बदलते परिप्रेक्ष्य में। उम्मीद की जा रही है कि यह सरकार विनिवेश संभावनाओं को बढ़ाने के साथ टैक्स को लेकर कुछ अहम एलान करेगी।  2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में पहला बजट पेश किया गया। इसे तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में पढ़ा था। इसके बाद एक मौके पर पीयूष गोयल और अब लगातार नौ बार से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बजट को पेश कर रही हैं। FM निर्मला सीतारमण के नाम भारतीय इतिहास में सबसे लंबे बजट भाषण का रिकॉर्ड दर्ज है। केंद्रीय बजट 2020 के दौरान उनका भाषण भारतीय इतिहास का सबसे लंबा रहा, जो 2 घंटे 42 मिनट तक चला। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय बजट 2019 में दिए गए 2 घंटे 17 मिनट के अपने ही रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। वहीं, दिवंगत अरुण जेटली का 2014 का बजट भाषण 2 घंटे 10 मिनट का था।

साल 2014 में लोकसभा चुनाव के कारण फरवरी में अंतरिम बजट पेश किया गया था। चुनाव के बाद सत्ता में आई मोदी सरकार ने जुलाई 2014 में अपना पहला पूर्ण बजट प्रस्तुत किया, जिसे तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पेश किया। 2014 के बजट में मध्यम वर्ग को राहत देने पर विशेष जोर दिया गया। आयकर छूट सीमा को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये किया गया, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई। इसके साथ ही सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन की सीमा को 1.1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किया गया। यह बजट नई सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं और कर सुधारों की दिशा का संकेतक माना गया। साल 2015 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कई अहम आर्थिक सुधारों की घोषणा की। सबसे बड़ा फैसला वेल्थ टैक्स को समाप्त करने का रहा। इसके साथ ही 1 करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक आय वाले व्यक्तियों पर सरचार्ज को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया। बजट में दीर्घकालिक बचत और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश पर मिलने वाले ब्याज को टैक्स फ्री किया गया। एनपीएस (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) में निवेश पर 50,000 रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट की घोषणा की गई। इसके अलावा बीमा क्षेत्र को राहत देते हुए व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन की सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया।

 

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