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Rahul Gandhi On Indian Foreign Policy: राहुल ने मांगा पीएम मोदी का इस्तीफा, भड़के शिंदे दी ये नसीहत!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Sat, 07 Mar 2026 04:45 AM IST

राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री Narendra Modi से इस्तीफे की मांग किए जाने के बाद देश की राजनीति में तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली। राहुल गांधी ने हाल ही में एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर पूरी तरह से विफल रही है और इसलिए प्रधानमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दे लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन सरकार इन पर ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है। राहुल गांधी ने कहा कि जनता के सामने जवाबदेही तय होना जरूरी है और लोकतंत्र में सरकार को अपने कामकाज के लिए जवाब देना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया।

राहुल गांधी के इस बयान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Eknath Shinde ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे पूरी तरह से बेबुनियाद बताया। शिंदे ने कहा कि राहुल गांधी का यह बयान राजनीतिक हताशा का परिणाम है और वे केवल सुर्खियां बटोरने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति की है, चाहे वह बुनियादी ढांचे का विकास हो, डिजिटल इंडिया की पहल हो या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मजबूत पहचान। शिंदे ने यह भी कहा कि विपक्ष लगातार सरकार की आलोचना करता रहता है, लेकिन उनके पास कोई ठोस विकल्प या सकारात्मक एजेंडा नहीं है।

एकनाथ शिंदे ने आगे कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री मोदी को भारी जनसमर्थन के साथ चुना है और देश की जनता उनके नेतृत्व पर भरोसा करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी लगातार देश की प्रगति को नज़रअंदाज़ कर केवल राजनीतिक लाभ के लिए बयानबाज़ी करते रहते हैं। शिंदे ने कहा कि अगर किसी को सरकार की नीतियों पर आपत्ति है तो उसे लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बीच जाकर अपनी बात रखनी चाहिए, न कि केवल इस्तीफे की मांग करके राजनीतिक माहौल को गरमाना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष के नेता सरकार की उपलब्धियों को सामने रखकर विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बयानबाज़ी आने वाले चुनावी माहौल को देखते हुए और तेज हो सकती है, क्योंकि सभी दल जनता के बीच अपनी-अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच जनता की नजर इस बात पर भी टिकी हुई है कि इन राजनीतिक आरोपों और जवाबों के बीच वास्तविक मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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