23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग के दौरान जिस तरह हिंसा, झड़पों और आरोप-प्रत्यारोप की तस्वीरें सामने आई थीं, क्या वही साया अब चुनाव प्रचार के आखिरी दिन और गहरा गया है? वीडियो में दिख रही महिला TMC की सांसद मिताली बाग, जिन्होंने फेसबुक लाइव के जरिए एक सनसनीखेज दावा किया। अब इस वीडियो के बाद ये सवाल उठने लगा की क्या लोकतंत्र के इस महापर्व में डर और दबाव हावी हो रहा है? और क्या राजनीतिक दल जीत के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं? आज के घटनाक्रम ने इन सवालों को और भी गंभीर बना दिया है… क्योंकि आरोप सीधे एक सांसद पर हमले के हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार का आखिरी दिन जैसे-जैसे खत्म होने की ओर बढ़ा, सियासी पारा चरम पर पहुंच गया। एक तरफ रैलियों और जनसभाओं में तीखे बयान सुनाई दिए, तो दूसरी ओर हिंसा के आरोपों ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया।
इस बार विवाद की केंद्र में हैं तृणमूल कांग्रेस यानी TMC की सांसद मिताली बाग, जिन्होंने फेसबुक लाइव के जरिए एक सनसनीखेज दावा किया। उनका आरोप है कि अरामबाग में चुनाव प्रचार के दौरान उनकी गाड़ी पर हमला किया गया। लाइव वीडियो में मिताली बाग ने बताया कि उनकी कार को निशाना बनाते हुए लाठी-डंडों से हमला किया गया, जिसमें उन्हें और उनके ड्राइवर को चोटें आईं।
टीएमसी का कहना है कि यह हमला उस वक्त हुआ जब मिताली बाग पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की रैली में शामिल होने जा रही थीं। पार्टी के मुताबिक, हमलावरों ने गाड़ी के शीशे तोड़ दिए और वाहन को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के बाद सांसद को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर टीएमसी ने इस हमले को “लोकतंत्र पर हमला” करार दिया। पार्टी ने इसे खासतौर पर एक अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाली महिला सांसद पर “कायरतापूर्ण हमला” बताया।
वहीं, टीएमसी ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि भाजपा चुनावी हार के डर से हिंसा और डराने-धमकाने की राजनीति कर रही है। टीएमसी ने अपने बयान में कहा कि भाजपा अब राजनीतिक रणनीति के बजाय “गुंडागर्दी” का सहारा ले रही है। TMC नेता सागरिका घोष ने TMC सांसद मिताली बाग की कार पर हुए हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए क्या कुछ कहा जरा सुनिए।
हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन चुनावी माहौल में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं हैं।
गौरतलब है कि 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान के दौरान भी कई इलाकों से हिंसा और झड़पों की खबरें सामने आई थीं। कई जगहों पर बूथ कब्जाने, मतदाताओं को डराने और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की घटनाएं देखने को मिली थीं। ऐसे में प्रचार के आखिरी दिन सामने आई यह घटना चुनावी माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल का चुनाव हमेशा से हाई-वोल्टेज रहा है, लेकिन इस बार हिंसा के आरोप जिस तरह लगातार सामने आ रहे हैं, वह चुनाव आयोग और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले चरणों में हालात और बिगड़ेंगे या फिर प्रशासन सख्ती दिखाकर निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित कर पाएगा?
फिलहाल, बंगाल की सियासत में आरोपों का दौर जारी है और जनता की नजर अब वोटिंग के अगले चरण पर टिकी है।