जिला परिषद चुनावों में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को लेकर सदर विधानसभा क्षेत्र में संशय की स्थिति बरकरार है। पार्टी की ओर से प्रत्याशी तय किए जाने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन उनके नाम सार्वजनिक करने को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पा रही। हमीरपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में विधायक भोरंज सुरेश कुमार समर्थित प्रत्याशियों के नामों को लेकर पूछे गए सवालों पर सीधा जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि पार्टी की परंपरा के अनुसार ब्लाॅक कांग्रेस ने प्रत्याशी तय किए हैं और नाम भी जारी किए गए हैं। हालांकि, पत्रकार वार्ता में मौजूद जिला और ब्लाक कांग्रेस के अध्यक्ष भी नामों का खुलासा नहीं कर सके। विधायक ने मंच पर बैठे पदाधिकारियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि प्रत्याशी तय हैं और नाम दोबारा सार्वजनिक कर दिए जाएंगे। दरअसल 19 वार्ड वाले जिला परिषद हमीरपुर में चार विधानसभा क्षेत्रों बड़सर, भोरंज, नादौन और हमीरपुर के 16 वार्ड में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों के नाम पार्टी की ओर से ब्लाक स्तर से जारी किए गए हैं, लेकिन सदर विधानसभा क्षेत्र में अब भी तस्वीर धुंधली बनी हुई है। यहां विधानसभा चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी रहे डॉक्टर पुष्पेंद्र वर्मा भी चुनावी गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं। ऐसे में समर्थित प्रत्याशियों को लेकर संगठन के भीतर असहज स्थिति की चर्चा है। विधायक सुरेश कुमार ने दावा किया कि कांग्रेस ने भाजपा की तुलना में अधिक एकजुटता के साथ प्रत्याशी तय किए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने प्रदेश स्तर से सूची जारी की और कुछ घंटों बाद ही उसमें बदलाव करना पड़ा, जबकि कांग्रेस ने पार्टी परंपरा के अनुसार सहमति से प्रत्याशी चुने। उन्होंने नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस की बड़ी जीत का दावा करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व और सरकार की नीतियों पर भरोसा जताया है। उनके अनुसार कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने प्रदेशभर में 31 से अधिक स्थानों पर जीत दर्ज की है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा, मंडी और शिमला जैसे बड़े जिलों में कांग्रेस को व्यापक समर्थन मिला है, जबकि चंबा के सभी नगर निकायों में कांग्रेस ने जीत हासिल की। सुरेश कुमार ने कहा कि भाजपा नेतृत्व गुटबाजी से जूझ रहा है, जबकि कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरी है। उन्होंने कहा कि सरकार चरणबद्ध तरीके से अपनी गारंटियां पूरी कर रही है। ओल्ड पेंशन योजना लागू कर कर्मचारियों से किया वादा निभाया गया है, वहीं किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू किया गया है।