मातृ दिवस पर ब्रह्मकुमारीज की तरफ से विवेकानंद नगर स्थित सेवा केंद्र में रविवार को आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में माताओं, बहनों एवं श्रद्धालुओं ने भाग लेकर मातृत्व की महिमा का गुणगान किया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सांसारिक मां के प्रति सम्मान प्रकट करना ही नहीं, बल्कि परमात्मा द्वारा दिए जा रहे दिव्य मातृत्व और आध्यात्मिक स्नेह के संदेश को समाज तक पहुंचाना भी रहा। इस दौरान बीके सुमन, बीके बाला, बीके मीना एवं बीके कविता विशेष रूप मौजूद रहीं। बीके सुमन दीदी ने कहा कि मां जीवन का प्रथम विद्यालय होती है। उसकी ममता, त्याग, सहनशीलता और संस्कार ही एक श्रेष्ठ समाज की नींव रखते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक मां अपने बच्चे का पालन-पोषण कर उसे जीवन जीने योग्य बनाती है, उसी प्रकार परमपिता परमात्मा इस संगमयुग में आत्माओं को आध्यात्मिक ज्ञान देकर उन्हें पवित्र, शक्तिशाली और श्रेष्ठ बना रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि आज के तनावपूर्ण और भागदौड़ भरे जीवन में परमात्मा का दिव्य स्नेह हर आत्मा को आंतरिक शांति, आत्मबल और सच्चे सुख की अनुभूति कराता है। जब मनुष्य अपने भीतर प्रेम, करुणा और सहनशीलता जैसे मातृत्व गुण विकसित करता है, तभी परिवार और समाज में वास्तविक सुख-शांति स्थापित होती है। कार्यक्रम के दौरान माताओं एवं बहनों ने मां की महिमा में सुंदर भजन और गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भावविभोर कर दिया। राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से महिलाओं को आत्मिक जागृति, संस्कार निर्माण तथा परिवार में प्रेम, सहयोग और सामंजस्य बढ़ाने का संदेश दिया गया। अंत में सभी उपस्थितजनों ने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में मातृत्व के दिव्य गुण प्रेम, दया, त्याग और सहनशीलता को अपना कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करेंगे।