फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

माफी की लकड़ी पर रोक से जनजातीय क्षेत्र में बढ़ी परेशानी

Renu Saklani Updated Sat, 14 Mar 2026 05:58 PM IST

जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में वर्ष 1872 से वाजिब-उल के तहत स्थानीय लोगों को मकान, औजार और अन्य जरूरतों के लिए माफी की लकड़ी देने की व्यवस्था रही है। इस परंपरा के तहत अंत्येष्टि के समय शव को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए देवदार के फट्टों का उपयोग किया जाता था। अगस्त 2023 में चकराता की कनासर रेंज में देवदार समेत कीमती लकड़ी के बड़े पैमाने पर अवैध कटान का मामला सामने आने के बाद यह व्यवस्था रोक दी गई। उस दौरान घरों और कार्यालयों से करीब 4500 स्लीपर बरामद किए गए थे। इसके बाद से ग्रामीणों को शव को यमुना घाट तक ले जाने के लिए फट्टों की जगह बस का सहारा लेना पड़ रहा है। स्थानीय लोग माफी की लकड़ी की व्यवस्था दोबारा शुरू करने और इसकी मात्रा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें