जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में वर्ष 1872 से वाजिब-उल के तहत स्थानीय लोगों को मकान, औजार और अन्य जरूरतों के लिए माफी की लकड़ी देने की व्यवस्था रही है। इस परंपरा के तहत अंत्येष्टि के समय शव को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए देवदार के फट्टों का उपयोग किया जाता था। अगस्त 2023 में चकराता की कनासर रेंज में देवदार समेत कीमती लकड़ी के बड़े पैमाने पर अवैध कटान का मामला सामने आने के बाद यह व्यवस्था रोक दी गई। उस दौरान घरों और कार्यालयों से करीब 4500 स्लीपर बरामद किए गए थे। इसके बाद से ग्रामीणों को शव को यमुना घाट तक ले जाने के लिए फट्टों की जगह बस का सहारा लेना पड़ रहा है। स्थानीय लोग माफी की लकड़ी की व्यवस्था दोबारा शुरू करने और इसकी मात्रा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।