गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में यात्रियों को बेहतर और स्वच्छ सुविधाएं देने के उद्देश्य से पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन पर करीब 35 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया आधुनिक सुलभ शौचालय अब अपनी बदहाल स्थिति को लेकर सवालों के घेरे में है। निर्माण के महज दो महीने बाद ही यहां गंदगी और अव्यवस्था का आलम ऐसा है कि यात्री शौचालय का इस्तेमाल करने से बच रहे हैं।
शौचालय के अंदर जगह-जगह कचरा बिखरा पड़ा है। कई नलों में पानी नहीं आ रहा, जबकि कुछ दरवाजों के लॉक भी टूटे हुए हैं। वॉश बेसिन की स्थिति भी साफ-सफाई की पोल खोल रही है। पर्याप्त डस्टबिन नहीं होने के कारण इस्तेमाल किए गए डायपर, सैनिटरी पैड और अन्य कचरा फर्श और आसपास बिखरा नजर आता है।
ड्रेनेज व्यवस्था भी ठीक नहीं होने से कई जगह पानी जमा हो रहा है। इससे शौचालय के भीतर लगातार दुर्गंध बनी रहती है। बाहर यात्रियों के बैठने के लिए रखी गई कुर्सियों के आसपास भी गंदगी फैली हुई है। बदबू के कारण यात्री वहां बैठने से भी कतरा रहे हैं।
यात्रियों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर आधुनिक सुविधा तैयार करने के बाद उसके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जाए तो पूरी योजना का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है। यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से तत्काल सफाई व्यवस्था सुधारने और नियमित निगरानी की मांग की है।
मामले में स्टेशन सुपरिंटेंडेंट आर. किशोर बाबू ने बताया कि स्टेशन की व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण किया जाता है। उन्होंने कहा कि सुलभ शौचालय की सफाई की जिम्मेदारी संबंधित वेंडर अथवा ठेकेदार की है। निरीक्षण के दौरान शौचालय की स्थिति सामने आने के बाद व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
यात्रियों ने नियमित सफाई, पानी की उपलब्धता, टूटे लॉक की मरम्मत, बेहतर ड्रेनेज और पर्याप्त डस्टबिन की व्यवस्था जल्द कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सार्वजनिक सुविधा तभी सार्थक होगी, जब वह वास्तव में साफ, सुरक्षित और उपयोग के लायक हो।