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रामनगर की रामलीला: सिर पर खडाऊं लेकर भरत चले अयोध्या, भक्ति देख आनंदित हो गए सभी लोग

Sat, 20 Sep 2025 11:24 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Ramnagar Ramlila 2025 : रामनगर की रामलीला के 15वें दिन सिर पर खडाऊं लेकर भरत अयोध्या चले तो लीला देखने के लिए लीलाप्रेमियों की भीड़ उमड़ पड़ी।  
 
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रामनगर की रामलीला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में 15वें दिन रामलीला में श्रीराम के खड़ाऊं को सिर पर धारण कर चित्रकूट से अयोध्या प्रस्थान करते भरत की भक्ति देख सभी आनंदित हो गए। भरत का चित्रकूट से विदा होकर अयोध्या गमन व नंदीग्राम निवास की लीला देखने के लिए लीलाप्रेमियों की भारी भीड़ रही।

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लीला के प्रारंभ में भरत ने श्रीराम से कहा कि गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से आपके राज तिलक के लिए सभी तीर्थों का जल लाया हूं उसे क्या करुं? भरत द्वारा तीर्थ वन, पशु, पक्षी तालाब आदि स्थानों को देखने की इच्छा प्रकट करने पर श्री राम कहते हैं कि अत्रि मुनि की आज्ञा लेकर निर्भय हो वन में भ्रमण करो। ऋषि राज जहां आज्ञा दें उसी स्थान पर तीर्थों के जल को रख देना। अत्रि मुनि के आदेश पर भरत ने पहाड़ के निकट एक सुंदर कूप के पास राजतिलक के लिए जल को रख दिया।

अत्रि मुनि ने कहा कि यह अनादि स्थल जिसे काल ने नष्ट कर दिया था। इस पवित्र जल के संयोग से यह स्थल संसार के लिए कल्याणकारी हुआ। इस कूप को आज से भरत कूप कहा जाएगा। ऋषि श्रीराम को भी भरत कूप की महिमा बताते हैं। श्रीराम व मुनि की आज्ञा मानकर भरत पांच दिनों तक चित्रकूट की प्रदक्षिणा करते हैं। प्रातः काल भरत सभी लोगों के साथ प्रभु श्रीराम से आज्ञा मांगते हैं और उनके द्वारा दिए गए खड़ाऊं को सिर पर बांध कर आनंदित होकर विदा लेते हैं।

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रामनगर की रामलीला - फोटो : अमर उजाला
इस पर श्रीराम गले लगाते हुए भरत को विदा करते हैं। लीला के दूसरे चरण में श्रीराम उदास होकर लक्ष्मण और सीता से कहते हैं कि भरत की दृढ़ता स्वभाव व मधु जबान की तुलना नहीं की जा सकती। देवतागण श्रीराम से कहते हैं कि जो अत्याचार देवताओं ने आप पर किया है उसे क्षमा करें। श्रीराम देवतागणों से कहते हैं कि अपने कल्याण के लिए काम कर रहे हैं, इसलिए धीरज धारण करिए। यहीं पर लीला की प्रथम आरती होती है।

भरत ने बनाया नंदीग्राम में पर्ण कुटी
भगवान श्रीराम की पादुका लेकर लौटे भरत सेवकों से कहते हैं हम सब महाराज के सेवक हैं और सेवक को ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे स्वामी को झूठा न बनना पड़े। गुरु वशिष्ठ की आज्ञा पाकर भरत श्रीराम की चरण पादुका को मंत्रोच्चार के बीच राज सिंहासन पर स्थापित करते हैं और फिर नंदीग्राम में पर्ण कुटी बनाकर 14 वर्ष के लिए वास करते हैं। यहीं पर भरत के नंदीग्राम वास की प्रसिद्ध आरती लेकर लीला प्रेमी भरत की जय जयकार करते हैं। 
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रामलीला - फोटो : अमर उजाला
रामलीला... भरत का भातृत्व प्रेम का ज्वार देख देवता सशंकित
भईया भरत को वन जाता देख देवता इस बात से सशंकित हैं कि भातृत्व प्रेम के ज्वार से करुणासिंधु राम प्रेम के वशीभूत न हो जाएं। गुरु वशिष्ठ, तीनों माताओं, अयोध्या के नगरवासियों, मंत्रीगणों व राज्याभिषेक के तमाम सामग्रियों सहित भरत और शत्रुघ्न अयोध्या से वन की ओर प्रस्थान करते हैं। शनिवार को श्री आदि रामलीला लाटभैरव वरुणा संगम काशी की लीला में भरत घंडईल का मंचन हुआ। राम को मनाकर वापस लाने व अयोध्या का राज्य ससम्मान श्री चरणों में अर्पित करने के दासत्व भाव के साथ भरत समेत समस्त नगरवासी गंगातट पर आ पहुंचे हैं। गंगापार के बाद प्रेमातुर भरत रथ से उतरकर नंगे पांव ही दुर्गम मार्गों पर चलते दिखाई दिए। भारद्वाज मुनि के आश्रम पहुंचकर लीला विश्राम हुआ। अगले दिन रामबाग में भरत मनावन की लीला होगी। इस अवसर पर समिति की ओर से व्यास दयाशंकर त्रिपाठी, सहायक व्यास पंकज त्रिपाठी, प्रधानमंत्री कन्हैयालाल यादव, केवल कुशवाहा, संतोष साहू, श्यामसुंदर, मुरलीधर पांडेय रहे। 
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