इस पर श्रीराम गले लगाते हुए भरत को विदा करते हैं। लीला के दूसरे चरण में श्रीराम उदास होकर लक्ष्मण और सीता से कहते हैं कि भरत की दृढ़ता स्वभाव व मधु जबान की तुलना नहीं की जा सकती। देवतागण श्रीराम से कहते हैं कि जो अत्याचार देवताओं ने आप पर किया है उसे क्षमा करें। श्रीराम देवतागणों से कहते हैं कि अपने कल्याण के लिए काम कर रहे हैं, इसलिए धीरज धारण करिए। यहीं पर लीला की प्रथम आरती होती है।
भरत ने बनाया नंदीग्राम में पर्ण कुटी
भगवान श्रीराम की पादुका लेकर लौटे भरत सेवकों से कहते हैं हम सब महाराज के सेवक हैं और सेवक को ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे स्वामी को झूठा न बनना पड़े। गुरु वशिष्ठ की आज्ञा पाकर भरत श्रीराम की चरण पादुका को मंत्रोच्चार के बीच राज सिंहासन पर स्थापित करते हैं और फिर नंदीग्राम में पर्ण कुटी बनाकर 14 वर्ष के लिए वास करते हैं। यहीं पर भरत के नंदीग्राम वास की प्रसिद्ध आरती लेकर लीला प्रेमी भरत की जय जयकार करते हैं।