सिद्धार्थनगर। एक ही पोजिशन में लंबे समय तक बैठने और आराम-तलब जिंदगी और जीवन में शारीरिक परिश्रम की कमी से स्पाइन के मरीज बढ़ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में के न्यूरो विभाग में प्रतिदिन इस तरह 10 से 15 मरीज आ रहे हैं, जिनमें यह समस्या मिल रही हैं। वहीं स्पॉन्डिलाइटिस के अन्य भी कई कारण हैं।
चिकित्सकों के अनुसार इस रोग में दर्द हाथ की उंगलियों से सिर तक होता है। शरीर के अंगों में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होने के साथ कई बार उल्टी आने की भी समस्या रहती है। मांसपेशियों में अधिक खिंचाव होता हैं, जिससे दवा के साथ-साथ हीट ट्रीटमेंट और कई बार सर्जरी भी करनी पड़ती है।
न्यूरो सर्जन डॉ. आशुतोष कुमार शुक्ला ने बताया कि शारीरिक सक्रियता की कमी और गलत पोस्चर के कारण स्पाइन कमजोर होने लगती है। इसमें विकृतियां आ जाती है, स्पाइन ही शरीर के ऊपरी भाग का पूरा भार सहती है और स्पाइनल कार्ड की सुरक्षा करती है। इस डिस्क की विकृति को स्पांडिलाइटिस कहते हैं।
गर्दन में दर्द होने को चिकित्सीय भाषा में सर्वाइकल पेन कहते हैं। गर्दन से होकर गुजरने वाली सर्वाइकल स्पाइन के जोड़ों व डिस्क में समस्या होने से सर्वाइकल पेन होता है। स्पॉन्डिलाइटिस के अनेक कारण होते हैं लेकिन प्रमुख कारण हैं। अधिक आराम-तलब जिंदगी और जीवन में शारीरिक परिश्रम की कमी। कई बार यह दर्द हड्डियों के कमजोर होने के कारण होता है। साथ ही मधुमेह व गठिया के मरीजों को इसका खतरा अधिक रहता है। रीढ़ की हड्डियों के क्षीण होने से यह समस्या होती है।