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Muzaffarnagar News: रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए चकबंदी लेखपाल की जमानत खारिज

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चरथावल (मुजफ्फरनगर)। अदालत ने किसान से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार चकबंदी लेखपाल परमेशवीर को जमानत देने से इनकार कर दिया। सहारनपुर के विशेष सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-1 (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) मनीष कुमार ने सुनवाई की। उन्होंने माना कि ऐसे गंभीर मामलों में सहानुभूति बरतने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।
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18 जुलाई को कस्बे में रोहाना मार्ग पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन यूनिट सहारनपुर के निरीक्षक साबिर अली ने टीम के साथ मामले में कार्रवाई की थी। दरअसल, बागपत के कस्बा छपरौली के मोहल्ला पट्टी धंधान निवासी परमेशवीर घटना के वक्त चरथावल में प्राइवेट कार्यालय बनाकर छपार क्षेत्र में चल रही चकबंदी का काम देखता था।
आरोप है कि चकबंदी के दौरान छपार क्षेत्रीय गांव सिंभालकी निवासी वादी बोबिंद्र के ताऊ रूल्हा सिंह के चक की पैमाइश कम कर दी थी। चक की पैमाइश पूरा करने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप है।
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गिरफ्तारी के बाद आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। बचाव पक्ष की ओर से आरोपी की गिरफ्तारी का समय भिन्न बताते हुए एक पेनड्राइव और 11 फोटो मौके के दाखिल किए। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। पीठासीन अधिकारी ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जमानत निरस्त कर दी।
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सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लेख
न्यायाधीश ने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय सीबीआई बनाम संतोष करनानी का उल्लेख किया। इसमें अवधारित किया गया कि भ्रष्टाचार हमारे समाज के लिए गंभीर खतरा है और इससे सख्ती से निपटना चाहिए। भ्रष्टाचार एक ऐसा पेड़ है जिसकी डालियां बहुत लंबी होती है और वह हर जगह फैल जाती है। इसीलिए ऐसे मामलों में सावधान रहने की जरूरत है।
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ये था मामला
चरथावल में भ्रष्टाचार निवारण संगठन के आरोपी लेखपाल को पकड़ने के लिए योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। 500 रुपये के 40 नोटों को फिनैफ्थलीन पाउडर लगाकर ट्रेपिंग के लिए रंग लगाकर किसान को दिए। किसान ने लेखपाल के प्राइवेट कार्यालय पर जाकर जैसे ही उसे रुपये थमाए, टीम ने रंगे हाथों उसे दबोच लिया। तितावी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। छपार क्षेत्र के गांव सिंभालकी निवासी किसान बोबिंद्र की ओर से लेखपाल परमेशवीर के खिलाफ भूमि की सही पैमाइश करने के बदले रिश्वत मांगने की शिकायत पर कार्रवाई हुई।
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