मौके पर विरोध जता रहे आसिफ, सरफराज, हमजा, सिराजुद्दीन और अशफाक ने कहा कि उन्होंने लाखों रुपये लगाकर यहां दुकानें खरीदी थीं जबकि कई लोग किराए पर शोरूम चला रहे हैं। अचानकसीलिंग से लाखों का माल दुकानों के अंदर बंद हो गया है।
व्यापारियों ने कहा, जब निर्माण हो रहा था, तब अधिकारी कहां थे? अगर यह अवैध था तो इसे शुरू में ही क्यों नहीं रोका गया? अब जब लोग बस गए हैं तब उगाही के लिए यह खेल खेला जा रहा है।
ग्रैंड स्क्वायर कॉम्प्लेक्स के दुकानदारों का आवास विकास पर गंभीर आरोप
दस्तावेजों और स्वामित्व का उलझा मामला
जांच में सामने आया है कि सेक्टर-12 स्थित भूखंड संख्या 427 और 428 को जोड़कर करीब 773 वर्ग मीटर में इस चार मंजिला कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया गया है जिसमें कुल 115 दुकानें हैं। जमीन के मूल आवंटी कस्तूरी लाल ने यह जमीन सईद सैफी को बेच दी थी लेकिन विभाग में इसका नामांतरण नहीं कराया गया। विभाग ने कस्तूरी लाल के नाम पर नोटिस जारी कर एक सप्ताह में अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया था और मियाद पूरी होने पर इसे सील कर दिया।
सभी विभागों की एनओसी का दावा
दूसरी ओर सईद सैफी का कहना है कि उनके पास फायर विभाग को छोड़कर अन्य सभी विभागों की एनओसी मौजूद है। दुकानदारों ने भी दावा किया कि उनके पास कमर्शियल बिजली कनेक्शन हैं और वे बाकायदा जीएसटी भी भर रहे हैं।
जब सभी सरकारी मानक पूरे किए जा रहे थे, तो इसे अवैध बताकर सील करना समझ से परे है। इस कार्रवाई के बाद व्यापारियों में भारी रोष है और उन्होंने आवास विकास के अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलने की चेतावनी दी है।