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एक जनपद एक व्यंजन: मेरठ की रेवड़ी-गजक को मिलेगा वैश्विक मंच, योजना से बढ़ेगी पहचान, खुलेंगे नए अवसर

Fri, 08 May 2026 10:29 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ की प्रसिद्ध रेवड़ी और गजक को एक जनपद एक व्यंजन योजना में शामिल किए जाने के बाद इसे राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। इससे स्थानीय कारोबारियों और पारंपरिक मिठाई उद्योग को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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मेरठ की रेवड़ी गजक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ के रेवड़ी -गजक के स्वाद को अब वैश्विक बाजार में पहचान मिलेगी। अनूठे स्वाद के लिए विख्यात रेवड़ी-गजक को एक जनपद एक व्यंजन योजना में शामिल किए जाने के बाद इसकी उम्मीद जगी है। मेरठ की रेवड़ी की खासियत है कि इसे जिसने भी एक बार चखा, वह उसे भूल नहीं पाया।

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एक जनपद एक व्यंजन योजना में मेरठ के पारंपरिक स्वाद को नई पहचान दिलाने की पहल छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए सोने में सुहागा साबित हो सकती है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रमुख व्यंजनों की व्यापक मैपिंग करने के बाद मेरठ की गजक और रेवड़ी को विशेष दर्जा दिया है।

सदर स्थित कांति प्रसाद शांति प्रसाद रेवड़ी-गजक के संचालक पार्थ सरकार की इस घोषणा से बेहद उत्साहित हैं। वह बताते हैं कि मेरठ की रेवड़ी और गजक वर्षों से लोगों की पसंद रही है। अब सरकार की पहल से इसे बड़े बाजार तक पहुंचाने का रास्ता खुलेगा।

बुढ़ाना गेट के कारोबारी संदीप रेवड़ी कहते हैं कि इस योजना के तहत बागपत का घेवर, मेरठ की गजक-रेवड़ी, सहारनपुर के शहद उत्पाद, मुजफ्फरनगर और शामली के गुड़ आधारित मिठाइयों को ब्रांडिंग के जरिए बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे स्थानीय कारोबारियों को सीधा लाभ मिलेगा और पारंपरिक मिठाइयों की मांग बढ़ेगी।

प्रेम स्वीट्स के संचालक नीरज के अनुसार सरकार की मंशा प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को फूड ऑफ यूपी के रूप में नई पहचान देने की है। इससे जिले के इस खास व्यंजन की पहचान बढ़ेगी। खानपान संस्कृति को बेहतर मंच मिलेगा।
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ओडीओपी की सफलता के बाद शुरू की गई एक जनपद एक व्यंजन योजना का उद्देश्य स्थानीय खानपान परंपरा को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना है। योजना से सबसे बड़ा फायदा छोटे हलवाइयों, कारीगरों और पारंपरिक मिठाई कारोबारियों को मिलने की उम्मीद है।

मांग बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। कैटरिंग और मिष्ठान से जुड़े कंकरखेड़ा निवासी राजेश खन्ना का कहना है कि अब रेवड़ी कारोबार को देश -दुनिया में अलग पहचान मिल सकेगी।

पर्यटन से भी इस योजना को जोड़कर देखा जा रहा है। इतिहासकार एके गांधी के अनुसार मेरठ आने वाले पर्यटकों के लिए अब रेवड़ी और गजक सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान के रूप में पेश की जाएगी।
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