मथुरा। क्षय रोग उन्मूलन की दिशा में मथुरा लगातार नए नवाचार अपना रहा है। संभावित टीबी रोगियों की पहचान और त्वरित जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग अब एक्स-रे परीक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) की मदद ले रहा है। विभागीय एप पर भेजे जा रहे एक्स-रे कुछ ही क्षणों में बता देते हैं कि रिपोर्ट सामान्य है या बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। बीमारी के लक्षण दिखने पर एक्सरे की जांच संबंधित चिकित्सक करते हैं और मरीज का स्वास्थ्य देखा जाता है।
मथुरा से क्षय रोग समाप्त की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। टीबी रोगियों के परिजन एवं उनके संपर्क में आने वाले लोगों की जांच एवं एक्सरे भी कराए जा रहे हैं। कार्य की गति बढ़े, चिकित्सक का समय, जांच रिपोर्ट गुणवत्तापरक हो इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रतिदिन हो रहे संभावित रोगियों के एक्सरे की जांच में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) की मदद की जा रही है। उपलब्ध कराए गए एप में एक्सरे को भेजा जाता है और कुछ ही देर में इसकी रिपोर्ट एआई दे देता है। इसको चिकित्सक क्रॉस चेक करते हैं। जिन संभावित रोगियों की जांच रिपोर्ट सामान्य आती है, उसे गंभीरता से नहीं देखा जाता है। एक्सरे में लक्षण दिखने की रिपोर्ट पर चिकित्सक चेक करते और संबंधित मरीज से बातचीत की जाती है। चिकित्सक पर लोड कम होता है। आंकड़ों के अनुसार एप में एक हजार से अधिक एक्सरे भेजे गए।
-प्रतिदिन हो रहे 25 से 30 एक्स-रे
वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक अखिलेश दीक्षित, बिहारी लाल आदि के अनुसार जिला क्षय रोग केंद्र में रोजाना 25 से 30 एक्स-रे किए जा रहे हैं। एआई आधारित विश्लेषण के बाद यदि रिपोर्ट में किसी तरह की असामान्यता पाई जाती है तो चिकित्सक तुरंत उसे दोबारा जांच कर मरीज को उचित सलाह व उपचार की प्रक्रिया शुरू करते हैं। एआई की सटीकता और तीव्र गति से जांच प्रक्रिया काफी आसान और तेज हो गई है।
-जनवरी से अब तक 16,000 से अधिक मरीज चिह्नित
समन्वयक शिवकुमार के अनुसार वर्ष 2025 में अब तक जनपद में 16,519 क्षय रोगी चिह्नित किए जा चुके हैं। सभी मरीजों को नियमित रूप से दवा उपलब्ध कराई जा रही है तथा विभागीय टीम द्वारा उनकी निगरानी की जा रही है।
हर माह 4000 संभावित मरीजों का नॉट परीक्षण
डिप्टी डीटीओ डॉ. सत्य प्रकाश राठौर के अनुसार टीबी की पुष्टि में सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले नॉट (न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट) परीक्षण का दायरा भी लगातार बढ़ाया जा रहा है। जिले में हर महीने लगभग 4000 संभावित मरीजों का नॉट टेस्ट (बलगम जांच) किया जा रहा है, जिससे रोग की पहचान शुरुआती चरण में ही हो सके। यह जांच सभी संभावित रोगियों के लिए है। जांच नेगेटिव आने पर एक्सरे कराते हैं। इसके बाद ही मरीज को बताया जाता बीमारी है या नहीं।
-परिजनों की भी की जा रही स्क्रीनिंग
क्षय रोग के प्रसार पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक चिह्नित मरीज के परिजन की स्क्रीनिंग भी सुनिश्चित की जा रही है। इसमें मुख्य रूप से एक्स-रे तथा नॉट परीक्षण शामिल हैं। इससे घर के अन्य सदस्यों में बीमारी के फैलाव की संभावना को समय रहते रोका जा सके।
इस तरह ले रहे एआई की मदद
- टीबी के संभावित मरीजों के एक्सरे को एआई एप में डाला जाता है। कुछ ही देर में एक सैकड़ा एक्सरे में से बीमारी वाले मरीज की जानकारी सामने आ जाती है। मरीज की जानकारी होने के बाद उसके एक्सरे को चिकित्सकों को दिखाया जाता है। एआई की मदद से चिकित्सक के ऊपर दबाव कम हो जाता है और वह मरीज का अच्छे तरीके से इलाज कर पाते हैं।
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एआई तकनीक के उपयोग से न सिर्फ रिपोर्टिंग तेज हुई है बल्कि संभावित रोगियों की अधिक सटीक पहचान भी हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आधुनिक व्यवस्था से जनपद में टीबी उन्मूलन अभियान को और मजबूती मिलेगी। रिपोर्ट को चिकित्सक भी चेक कर रहे हैं।
डॉ. संजीव यादव, जिला क्षय रोग अधिकारी मथुरा