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राहत: छावनी क्षेत्र में बनेंगे तीन नए जलाशय, जल निगम को भेजा गया प्रस्ताव; तीन वार्डों के मिलेगी राहत
Fri, 21 Aug 2026 10:04 AM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 21 Aug 2026 10:04 AM IST
आगरा छावनी के तीन वार्डों में पेयजल संकट दूर करने के लिए करीब 1.50 करोड़ रुपये की लागत से तीन नए भूमिगत जलाशय बनाने की योजना है। प्रत्येक जलाशय की क्षमता 2.50 लाख लीटर होगी और डीपीआर व एस्टीमेट तैयार कर जल निगम को प्रस्ताव भेज दिया गया है।
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आगरा छावनी
- फोटो : अमर उजाला
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पेयजल संकट से जूझ रहे छावनी क्षेत्र के तीन वार्डों को राहत दिलाने के लिए प्रशासन ने पहल की है। करीब 1.50 करोड़ रुपये की लागत से 2.50-2.50 लाख लीटर क्षमता के तीन नए भूमिगत जलाशयों का निर्माण कराने की योजना है। डीपीआर और एस्टीमेट तैयार कर जल निगम को प्रस्ताव भेज दिया गया है। विभागीय अधिकारियों को छह महीने के भीतर काम पूरा होने की उम्मीद है।
जलापूर्ति प्रभारी सत्येंद्र सिंह ने बताया कि तीनों जलाशय उन्हीं स्थानों पर बनाए जाएंगे, जहां जर्जर पानी की टंकियां तोड़ी गई थीं। बता दें कि इन टंकियों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था मुक्कमल किए ही ध्वस्त कर दिया गया था। फिलहाल भूमिगत जलाशयों से आपूर्ति की जा रही है। इनकी क्षमता कम होने, जर्जर और रिसाव होने के कारण 20-25 मिनट में ही इनका पानी खत्म हो जाता है। टक्कर रोड से भी मात्र 15-20 मिनट जलापूर्ति हो पा रही है, वह भी खारा है। ऐसे में क्षेत्रीय लोग इसका उपयोग सिर्फ सफाई आदि में कर पाते हैं।
छावनी परिषद को जलकल विभाग से रोज छह एमएलडी पानी मिलता है। इसमें नौलक्खा पंपिंग स्टेशन से चार और छीपीटोला से दो एमएलडी शामिल है। परिषद इसके बदले हर माह 25 लाख रुपये देती है। क्षेत्रीय निवासी मोहम्मद अकरम ने बताया कि पानी का प्रेशर न आने से बहुत दिक्कत होती है। मोहम्मद असलम ने बताया कि जलापूर्ति का समय भी निश्चित नहीं है। छावनी क्षेत्र के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. पंकज महेंद्रू बताया कि बिना वैकल्पिक टंकी की व्यवस्था किए टंकियों को तोड़ दिया गया, इससे दिक्कत और बढ़ गई है।
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जलापूर्ति प्रभारी सत्येंद्र सिंह ने बताया कि तीनों जलाशय उन्हीं स्थानों पर बनाए जाएंगे, जहां जर्जर पानी की टंकियां तोड़ी गई थीं। बता दें कि इन टंकियों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था मुक्कमल किए ही ध्वस्त कर दिया गया था। फिलहाल भूमिगत जलाशयों से आपूर्ति की जा रही है। इनकी क्षमता कम होने, जर्जर और रिसाव होने के कारण 20-25 मिनट में ही इनका पानी खत्म हो जाता है। टक्कर रोड से भी मात्र 15-20 मिनट जलापूर्ति हो पा रही है, वह भी खारा है। ऐसे में क्षेत्रीय लोग इसका उपयोग सिर्फ सफाई आदि में कर पाते हैं।
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छावनी परिषद को जलकल विभाग से रोज छह एमएलडी पानी मिलता है। इसमें नौलक्खा पंपिंग स्टेशन से चार और छीपीटोला से दो एमएलडी शामिल है। परिषद इसके बदले हर माह 25 लाख रुपये देती है। क्षेत्रीय निवासी मोहम्मद अकरम ने बताया कि पानी का प्रेशर न आने से बहुत दिक्कत होती है। मोहम्मद असलम ने बताया कि जलापूर्ति का समय भी निश्चित नहीं है। छावनी क्षेत्र के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. पंकज महेंद्रू बताया कि बिना वैकल्पिक टंकी की व्यवस्था किए टंकियों को तोड़ दिया गया, इससे दिक्कत और बढ़ गई है।
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