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झकझोर देगी घटना: बेटे ने डायरिया से दम तोड़ा तो सदमे में मां ने भी छोड़ दी दुनिया, नम हुई हर आंख

Wed, 27 May 2026 12:12 AM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा

सार

यूपी के महोबा जिले में झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। डायरिया से बेटे की मौत हो गई। सदमे में मां ने भी दम तोड़ दिया। 
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हसनैन व मां रजिया खातून की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मूलरूप से कस्बा चरखारी और वर्तमान में मध्यप्रदेय के हरपालपुर के मोहल्ला स्टेशन में रहने वाली मां व उसके बेटे की मौत की खबर ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। छह साल के बेटे ने डायरिया से दम तोड़ा तो सदमे में मां ने भी अपने प्राण छोड़ दिए। यह खबर जब उनके परिजनों को मिली तो कोहराम मच गया। मंगलवार की शाम मां-बेटे के शव अंतिम संस्कार के लिए चरखारी पहुंचे तो हर आंख नम नजर आई।
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जनपद छतरपुर के हरपालपुर नगर के मोहल्ला स्टेशन निवासी रजिया खातून (36) अपने पति सुब्हान अहमद और बेटे हसनैन (06) के साथ रहती थी। दोपहर के समय हसनैन को अचानक तेज पेटदर्द व उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। हालत बिगड़ने पर उसे हरपालपुर अस्पताल ले जाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे नौगांव रेफर किया गया। नौगांव में भी हसनैन की हालत गंभीर बनी रही। जिसके बाद उसे जिला अस्पताल छतरपुर भेजा गया। रजिया और अन्य परिजन हसनैन को कार से लेकर छतरपुर के लिए रवाना हुए लेकिन रास्ते में ही हसनैन की मौत हो गई। बेटे के शरीर में किसी तरह की हलचल न होने पर रजिया की भी हालत बिगड़ने लगी।

 

जिला अस्पताल में डाॅक्टर ने हसनैन को मृत घोषित कर दिया जबकि रजिया खातून का इलाज शुरू किया लेकिन कुछ देर बाद उसकी भी मौत हो गई। मृतका के भाई मोहम्मद सलीम ने बताया कि छतरपुर लाते समय रजिया खातून, हसनैन को अपनी गोद में लेकर जा रही थी। रास्ते में जब बच्चे के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई तो रजिया को यह अहसास हुआ कि बेटे की मौत हो चुकी है।


 

मां बर्दाश्त न कर सकी सदमा
यह सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर सकी और उनकी तबियत भी बिगड़ गई। अस्पताल पहुंचने के कुछ देर बाद ही उन्होंने भी दम तोड़ दिया। बताया कि परिवार की स्थिति पहले से ही बेहद खराब थी। रजिया के पति सुब्हान अहमद चौथे श्रेणी के कैंसर पीड़ित है और लंबे समय से बिस्तर पर हैं। परिवार की पूरी जिम्मेदारी रजिया पर थी।
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मंगलवार की शाम दोनों के शव कस्बा चरखारी स्थित मोहल्ला भैरोगंज पहुंचे तो लोगों की भीड़ जमा हो गई। कस्बा चरखारी रजिया का मायका था। ससुराल में पति की तबियत खराब होने पर परिजन शवों को महोबा के चरखारी लाए। जहां अंतिम संस्कार की तैयारी की गई। कोतवाल चरखारी प्रवीण कुमार सिंह का कहना है कि उन्हें इस प्रकार की कोई सूचना नहीं दी गई है।
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