पंडित गया प्रसाद जी ने अपने जीवनकाल में हाथरस के मोहल्ला जागेश्वर स्थित स्कूल में अध्यापन कार्य किया और शिक्षा के साथ-साथ भक्ति और सेवा के आदर्शों को भी समाज में फैलाया।
गोशाला के साथ अन्य दो संस्थाओं का हो रहा संचालन
करीब सवा सौ साल स्थापित हुई गोशाला का संचालन आज भी दानदाताओं के सहयोग से चल रह है। अच्छी बात यह कि सवा सौ साल में संस्था सार्वजनिक धार्मिक सभा के द्वारा सिर्फ गोशाला नहीं बल्कि शहर के सरस्वती इंटर कॉलेज, सरस्वती डिग्री कॉलेज और रामलीला कमेटी का भी संचालन करती है।
श्रीकृष्ण गोशाला से मैं करीब 14 वर्ष की उम्र में जुड़ा था। तलहटी में बाबा के शरीर त्यागने के बाद मैंने कुछ लोगों के साथ उनकी अस्थियों के साथ परिक्रमा लगाई और गोशाला आ गया। यहां करीब सात दिन तक अस्थियां रखी रहीं। तब उनके पुत्र मानस ने यहां विश्राम स्थल में पधरवाया था।-पं. श्याम कुमार शर्मा, गोसेवक एवं गोशाला व्यस्थापक।
गऊ सेवा अपने आप में एक भक्ति है। गोशाला में करीब 14 कर्मचारी अपने श्रम के साथ गोसेवा में लगे हुए हैं। पंडित गयाप्रसादजी के गोशाला स्थित विश्राम स्थल बृज की भक्ति परंपरा, संत जीवन और श्रीकृष्ण प्रेम की जीवंत धरोहर का प्रतीक है।-डा. राधेश्याम शर्मा, पूर्व प्राचार्य, सरस्वती महाविद्यालय, हाथरस।
संस्था के पास करीब 108 बीघा जमीन है, जिसकी चहारदीवारी कराई गई है, गोशाला में लगातार कुछ न कुछ कार्य कराया जाता है, भव्य सत्संग भवन बना हुआ है, बाबा की परम कृपा व ठाकुरजी के आशीर्वाद से खुद ब खुद सब काम हो रहे हैं।-दीपेश अग्रवाल सराफ, अध्यक्ष, श्रीकृष्ण गोशाला, हाथरस