मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बुधवार को मरीज देखते चिकित्सक।
एटा। कोहरा, बादल, शीतलहर के मिले-जुले असर से पड़ रही भीषण ठंड बुजुर्गाें के लिए आफत ही नहीं जानलेवा भी बन गई है। 10 दिन में 17 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 11 बुजुर्ग सांस पीड़ित थे और 6 की जान हार्टअटैक से गई।
मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों के अनुसार 6 जनवरी तक 10 दिनों में 60 से अधिक लोग इमरजेंसी में सांस व हृदय की बीमारी के पीड़ित भर्ती किए गए। सांस के 11 और हार्टअटैक से 6 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। बुधवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 1850 लोगों ने पर्चे बनवाकर दवा ली। इसमें से लगभग 800 लोगों ने मेडिसिन विभाग में परामर्श लिया। यहां लगभग 550 मरीज सर्दी के कारण खांसी, बुखार, सांस व सीने में दर्द की समस्या से पीड़ित पहुंचे।
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. एस चंद्रा ने बताया कि सर्दी के मौसम में बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। तापमान कम होने से धमनियां सिकुड़ती हैं और बीपी बढ़ जाता है। श्वसन तंत्र भी प्रभावित होता है। सांस के रोगी व हृदय रोग से पीड़ित लोग घर से बाहर कम ही निकलें। पूरे व गर्म कपड़े पहनकर रहें और अलाव की अपेक्षा रूम हीटर का प्रयोग करें। इसका कारण है कि अलाव के धुएं से हृदय की बीमारी से पीड़ित लोगों को दिक्कत हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवम यादव ने बताया कि बच्चों को सर्दी में पूरी तरह से गर्म कपड़ों में ढककर रखें। 6 माह तक के बच्चों को सिर्फ मां का दूध ही पिलाएं। बच्चों को घर से बाहर ले जाने से पहले पर्याप्त गर्म कपड़े पहना लें। पानी व दूध गुनगुना पिलाएं। पौष्टिक खाना खिलाएं और प्लास्टिक की बोतल से दूध न पिलाएं।