ग्रामीणों को जानकारी देते सर्विलांस अधिकारी
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सीरो सर्विलांस में मिली एंटीबॉडी
मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. मनमोहन पांडेय के मुताबिक बतौर सीरो सर्विलांस आईवीआरआई में सैंपल की जांच कराई गई तो रिपोर्ट में जेई वायरस संबंधित एंटीबॉडी मिली है। जाहिर है कि सुअर संक्रमित हैं। अगर मच्छर इन्हें काटकर स्वस्थ व्यक्ति को काट लें तो उसके भी जेई की चपेट में आने की आशंका है। लिहाजा, क्षेत्र के सभी सुअर पालकों को अलर्ट किया है। लोगों को मच्छरदानी और मच्छररोधी उपकरणों आदि का प्रयोग करने के लिए कहा गया है।
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पालकों को निर्देश
सूकर बाड़े में सफाई रखें। चूने का छिड़काव करें। सूअर की मौत होने पर शव का नियमानुसार निस्तारण करें। बाहर से किसी सूअर का आवागमन प्रतिबंधित करें।
बच्चे को मिलेगी आर्थिक सहायता
जेई की चपेट में मिले साढ़े तीन साल के बच्चे आकिब अली के लकवाग्रस्त होने की पुष्टि हुई तो आर्थिक सहायता के तहत एक लाख रुपये मिलेंगे। अगर हालत बिगड़ी और मौत हो गई तो परिजनों को 50 हजार रुपये मिलेंगे। अस्पताल से दवा चल रही हैं। स्वास्थ्य केंद्र से निगरानी हो रही है।
तीन किमी के दायरे में क्यूलेक्स मच्छर मार सकते हैं डंक
आईडीएसपी इंचार्ज डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक, जेई का वायरस क्यूलेक्स की ट्रिटाइनियोरिंचस, विस्नुई, गेलीडस प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है। जेई ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में फैलता है। खासतौर पर जहां सूअर पालन होता है या धान के खेत में पानी भरा रहता है। सर्विलांस के दौरान संबंधित इलाके में क्यूलेक्स मच्छरों का घनत्व सामान्य से ज्यादा मिला।
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जानिए, क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस
जापानी इंसेफेलाइटिस एक वायरल मस्तिष्क संबंधी संक्रमण है जो मच्छरों से फैलता है। इसका संक्रमण इन्सान से इन्सानों में नहीं होता। वायरस मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को प्रभावित करता है। इससे तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी, दौरे, गर्दन में अकड़न, मानसिक भ्रम, व्यवहार में बदलाव जैसे सामान्य लक्षण समेत गंभीर मामलों में पैरालिसिस (लकवा), कोमा की आशंका रहती है।