कई कोचिंग सेंटरों के पास नहीं है फायर एनओसी
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घर में संचालित हो रही कोचिंग
रिहायशी इलाके जनकपुरी में एक घर के भीतर ही कोचिंग संचालित की जा रही है। यहां आग बुझाने का एक साधारण यंत्र तक मौजूद नहीं है। कोचिंग संचालक से सवाल किया गया तो उन्होंने जिम्मेदारी लेने के बजाय सरकारी विभागों का हवाला देते हुए मामले को टाल दिया।
संकरी गली में खोल दिया सेंटर
बांके बिहारी मंदिर के पास एक संकरी गली में स्थित भवन के प्रथम तल पर कोचिंग संचालित की जा रही है। नीचे परिवार रह रहा है। यह लापरवाही किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में भारी जनहानि का सबब बन सकती है।
कबाड़ से पटा है आपातकालीन द्वार
आवास विकास कॉलोनी स्थित प्रतिष्ठित कोचिंग सेंटर का हाल और भी बदतर मिला। यहां पहली मंजिल पर काफी संख्या में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, लेकिन वहां का आपातकालीन निकास द्वार कबाड़ से पटा और बंद है।
आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं
झूलेलाल द्वार रोड के पास स्थित एक अन्य कोचिंग सेंटर में ग्राउंड फ्लोर पर क्लास और पहली मंजिल पर लाइब्रेरी संचालित की जा रही है, मगर पूरे परिसर में आपातकालीन निकास की कोई व्यवस्था नहीं है।
विभागों में तालमेल नहीं
मुख्य अग्निशमन अधिकारी मनु शर्मा का कहना है कि उनके विभाग को यह जानकारी ही नहीं दी जाती कि जिले में कुल कितने कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण हुआ है। विभागों के बीच तालमेल की इस कमी का फायदा कोचिंग संचालक उठा रहे हैं। उन्हें बच्चों के भविष्य और उनकी जान से ज्यादा चिंता अपनी जेबें भरने की है।
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि दो जुलाई से सभी कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए सभी पंजीकृत संस्थानों को नोटिस जारी किए गए हैं। नियमानुसार एनओसी के बिना पंजीकरण नहीं हो सकता। एक जून से ही मैंने कार्यभार संभाला है। यहां इन कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण कैसे हुआ है, इसकी जांच कराई जाएंगी।