बरेली। पहली बारिश ने ही नगर निगम के नाला सफाई के दावों की पोल खोल दी। ठेकेदारों ने बजट तो साफ कर दिया, लेकिन शहर के बड़े नाले अब भी सिल्ट से भरे पड़े हैं। शहर में 350 छोटे-बड़े नाले हैं, लेकिन इनकी तली झाड़ सफाई नहीं हो पा रही है। ठेकेदारों की मनमानी से शहर पर जलभराव का खतरा मंडरा रहा है। मंगलवार को मुख्यमंत्री के आगमन से पहले हुई हल्की बारिश में ही पुलिस लाइन के सामने का नाला चोक हो गया था। बुधवार को शहर के कुछ ऐसे ही बड़े नालों की पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आ गई।
सिकलापुर नाला
सिकलापुर नाला कूड़े और सिल्ट से पटा है। रोडवेज के पास बने हनुमान मंदिर के सामने नाले में कूड़े के अलावा कुछ नजर नहीं आता। बारिश में वहां जलभराव होना तय है। नाले पर पत्थर डालकर लोगों ने अतिक्रमण भी कर रखा है। इससे वहां सफाई नहीं हो पा रही है। ठेकेदार भी नाला सफाई के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं।
मिशन रोड नाला
मिशन रोड का नाला जलनिकासी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सुभाषनगर तक जाता है। ठेका होने के बाद भी यह नाला पूरी तरह से साफ नहीं हुआ है। नाले में सिल्ट और कूड़ा पड़ा है। कुछ दिन पहले इस नाले की सफाई के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी की गई थी। इसके चलते बरसात में यहां भी जलभराव होना तय है।
बाकरगंज नाला
बाकरगंज क्षेत्र के लोग पहले ही कूड़े के पहाड़ से परेशान हैं। अब नाला साफ न होने से उनकी मुसीबत और बढ़ गई है। बाकरगंज का नाला वहां से सिटी स्टेशन की ओर जाता है। सफाई के अभाव में इसमें सिल्ट जमी है। अगर बरसात से पहले यह नाला साफ नहीं हुआ तो यहां के लोगों को जलभराव की मुसीबत झेलनी पड़ेगी।
जाटवपुरा नाला
जाटवपुरा क्षेत्र की तंग गलियों में बने नालों की सफाई नहीं हो पाई है। बारिश होने पर यहां बहुत तेज गति से पानी आता है और नाले में जाता है, लेकिन नाले साफ न होने से जलभराव होना तय है। जाटवपुरा के बाहर फर्नीचर का काम होता है। नाले चोक होने के कारण बरसात में यहां जलभराव की स्थिति पैदा होना निश्चित है।
वर्जन
नाला सफाई की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। लापरवाह ठेकेदारों पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है। जो नाले गंदे हैं, उन्हें दिखवाया जाएगा। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त