टीबी के खिलाफ लड़ाई में दवा के साथ पोषण को सबसे बड़ा हथियार माना जाता है, लेकिन अलीगढ़ में हजारों मरीज इसी सहारे से वंचित हो रहे हैं। निक्षय मित्र बनकर पोषण पोटली देने का वादा करने वाले उद्योगों और संस्थानों ने सहयोग कम कर दिया है। नतीजतन 11695 में सात हजार से अधिक टीबी मरीज कई दिन से अगली पोटली का इंतजार कर रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल की तुलना में इस साल 77% कम पोटली बांटी गईं। 2025 में 35493 पोटली वितरित की गईं जबकि इस साल 15 मई तक यह संख्या 8150 रही।
दरअसल सितंबर 2024 में 20 उद्योगों को निक्षय मित्र बनाया गया जिन्होंने सीएसआर फंड से मरीजों को निशुल्क पोषण पोटली वितरित कराईं। प्रत्येक पोटली में एक-एक किलो मूंगफली, भुना चना, गुड़, सत्तू, तिल-गजक होता है। कुछ समय तक यह प्रक्रिया चलती रही, लेकिन इसके बाद एक-एक करके उद्योगों ने हाथ खींचना शुरू कर दिया। मौजूदा स्थिति ऐसी है कि 15 उद्योगों से सहयोग नहीं मिल रहा है। इनमें कुछ के विषय में रुचि न दिखाने, कुछ पर फैक्टरी बंद होने, कुछ पर मना करने, कुछ पर सीएसआर फंड खत्म होने व कुछ ने स्वीकृति नहीं मिलने का हवाला दे रही है। यह जानकारी बीते 25 मई को तत्कालीन सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी ने जिला उद्योग केंद्र को लिखे पत्र में दी। इसमें यह भी लिखा है कि पोषण पोटली को लेकर इन दाताओं से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है।
उद्योगों का यह रहा सहयोग
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मंगलम सीमेंट अनूपशहर रोड ने छह माह तक सहयोग किया। फिर इस वर्ष मार्च में 200 पोटली दीं। वंडर सीमेंट सोमना ने 12 महीने तक लगातार पोटली वितरण में सहयोग किया। इसी तरह, अल्ट्राटेक सीमेंट कासिमपुर ने आठ माह, फिर कभी-कभार, एलाना मीट उद्योग तालसपुर की एक यूनिट से लगातार व दूसरी यूनिट से छह माह मिलीं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन करसुआ ने अभी तक सहयोग नहीं किया। जायडस छेरत ने छह माह, फिर एक बार 300 पोटली वितरण में सहभागिता की। भोले बाबा डेयरी खैर रोड और धनजीत वाडरा तालानगरी, राजीव गर्ग मैटल इंडस्ट्री ने छह-छह माह दीं। सुमित सराफ शेखर ग्रुप ने नौ माह पोटली दीं। राजेश अग्रवाल मसकट ग्रुप ने अभी तक एक भी नहीं दीं। अलहम्द मीट इंडस्ट्री इलियासपुर, अलदुआ मीट इंडस्ट्री अमरपुर, पावना ग्रुप आगरा रोड व फेयर एक्सपोर्ट तालसपुर से तीन माह पहले तक मिली हैं, लेकिन अब बंद हैं।
एएमयू ने सिर्फ एक महीने किया सहयोग
कुछ स्वयं सेवी संगठन और पांच औद्योगिक इकाइयां ऐसी हैं, जो जिले के टीबी मरीजों के लिए लगातार पोषण पोटली दे रहे हैं। राज्यपाल के निर्देश पर राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय भी टीबी मरीजों की मदद के लिए आगे आया लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कागजात बताते हैं कि आरएमपीयू ने अब तक सिर्फ तीन महीने ही सहयोग किया जबकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने एक महीने ही बजट दिया।
क्या कहते हैं अधिकारी
. वित्तीय वर्ष बदलने से अप्रैल और मई में कुछ दिक्कतें आई हैं। इसके लिए पत्राचार किया है। तीन उद्योगों ने सहयोग नहीं किया है। डॉ. राहुल शर्मा, जिला क्षय रोग अधिकारी
. हमारा लक्ष्य पहले से तय है। सीधे स्वास्थ्य विभाग को पोटली देते हैं। अगर कोई समस्या आती है तो विभाग हमें जानकारी देते हैं और फिर संबंधित उद्योगों से संपर्क किया जाता है। ऐसा नहीं है कि कोई बिल्कुल नहीं दे रहा हो।- एसपी यादव, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र