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हिमाचल विस सत्र: CM बोले- आपदा प्रबंधन एक्ट हटने पर ही पंचायत चुनाव, राज्य निर्वाचन आयोग भी इसके दायरे में

Thu, 27 Nov 2025 04:44 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, तपोवन(धर्मशाला)।

सार

विधानसभा के शीत सत्र में गुरुवार को सदन में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन एक्ट लागू है। 
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विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन एक्ट लागू है। जैसे ही एक्ट हटेगा, वैसे ही पंचायतों और स्थानीय निकायों के चुनाव करवा दिए जाएंगे। वीरवार को मुख्यमंत्री ने तपोवन में विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन कहा कि आज से इस एक्ट को पूरी तरह लागू किया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग भी इसके दायरे में है और अलग से किसी भी तरह के निर्देश जारी नहीं कर सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कुछ नई पंचायतें भी बनानी हैं। नालागढ़ में तो कुछ ऐसी पंचायतें भी हैं, जहां नौ-नौ हजार की जनसंख्या है। सीएम के इस जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया।

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पंचायत चुनाव पर विपक्ष की ओर से लाए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में सीएम ने कहा कि चुनाव स्थगित नहीं किए गए हैं। थोड़े समय के लिए रुके हैं। राज्य निर्वाचन आयोग इसमें कुछ नहीं कर सकता। प्रदेश में आपदा प्रबंधन एक्ट लगा है और चुनाव आयोग फिर भी चिट्ठी लिख रहा है। आयोग को भी कहा गया है कि थोड़े वक्त के लिए चुनाव रोके गए हैं। पहले सड़कें दुरुस्त होंगी। सुक्खू ने कहा कि पंचायत चुनाव के लिए जून में आयोग ने अपना काम शुरू कर दिया था। किसी ने कल्पना नहीं की थी कि इस साल भी बरसात में 2023 से बड़ी आपदा आएगी। पहले मंडी, उसके बाद कुल्लू और फिर पूरे प्रदेश में आपदा आ गई। इसके बाद राज्य में डिजास्टर एक्ट लगाया गया। सड़कें अवरुद्ध हो गईं। सेब सीजन के बीच सड़कें खराब होने से सरकार ने मंडी मध्यस्थता योजना के तहत 100 करोड़ रुपये का सेब खरीदा। परिस्थितियां ऐसी हो गईं कि आपदा प्रबंधन एक्ट लगाना पड़ा। सभी अधिकारी पुनर्वास कार्यों में लगे हैं।

विपक्ष को घेरते हुए सीएम ने कहा कि जून 2022 से पहले शिमला में नगर निगम के चुनाव हो जाने चाहिए थे, लेकिन तब भाजपा सरकार ने चुनाव नहीं करवाए। छह माह के भीतर चुनाव करवाने होते हैं। उस वक्त भाजपा की चुनाव करवाने की मंशा नहीं थी। सुक्खू ने कहा कि कई राज्यों में चुनाव देरी से करवाए गए हैं, पर प्रदेश सरकार का ऐसा विचार नहीं है।
 

आपदा से 631 पंचायतों के भवनों को पहुंचा नुकसान : अनिरुद्ध
मुख्यमंत्री के जवाब से पहले पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि पंचायत चुनाव के लिए 30 जनवरी तक का समय है। जब आपदा प्रबंधन एक्ट लगता है तो सारी प्रक्रियाएं थम जाती हैं। आपदा में 631 पंचायतों के भवनों को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में इनमें चुनाव नहीं करवाए जा सकते। पंचायतों में 196.30 करोड़ का नुकसान हो चुका है। मुख्यमंत्री और उनके बयान अलग-अलग नहीं हैं, जैसा विपक्ष कह रहा है। उन्होंने यही कहा है कि पंचायत चुनाव सही समय पर होंगे। सरकार ओबीसी रोस्टर को भी ठीक से लागू करने पर विचार कर रही है। गुजरात, उत्तर प्रदेश, असम, उत्तराखंड और महाराष्ट्र में क्यों चुनाव सरकाए गए। इस पर भी चर्चा होनी चाहिए।

18 विधायकों ने लिया पंचायत चुनाव पर चर्चा में भाग
पंचायत चुनाव पर विपक्ष की ओर से लाए स्थगन प्रस्ताव पर 18 विधायकों ने दो दिन तक चर्चा की। विपक्ष ने शीत सत्र के पहले दिन सारा काम रोककर नियम 67 के तहत यह प्रस्ताव लाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन 18 विधायकों में ज्यादातर कांग्रेस के थे, जबकि यह प्रस्ताव भाजपा ने लाया।

टालमटोल नहीं, संविधान का पालन करे सरकार : कटवाल
झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव के मामले में प्रदेश सरकार को संविधान के प्रावधानों का पालन करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचना जारी करने के बाद किसी भी स्तर पर टालमटोल का रवैया सही नहीं है। मोदी सरकार एक देश एक चुनाव की ओर आगे बढ़ रही है। इस व्यवस्था मं केंद्र और राज्यों के चुनाव एक साथ करवाए जाएंगे और उसके 100 दिन के भीतर पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव होंगे। ऐसे में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव टालने के लिए बेतुके और हास्यास्पद तर्क देने के बजाए सरकार को इन्हें निर्धारित समय पर करवाना चाहिए। हार और जीत एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं।

पंचायत चुनाव को लेकर विधानसभा में नियम-67 के तहत काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए जीतराम कटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि 73वां और 74वां संविधान संशोधन कांग्रेस की देन है। यदि ऐसा है तो हिमाचल में पंचायती राज एक्ट-1994 भी इसी संशोधन की अनुपालना में लागू हुआ है। ऐसे में आपदा का हवाला देकर या किसी अन्य तर्क से इन्हें बेवजह टालना किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है। सरकार को यह याद रखना चाहिए कि पंजाब का ऐसा ही मामला सुप्रीम कोर्ट में टिक भी नहीं पाया। सर्वोच्च अदालत ने समय पर चुनाव करने के आदेश दिए। पंचायत चुनाव को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट में भी पीआईएल दायर हुई है। इसमें सरकार को 15 दिसंबर तक जवाब देना होगा, जबकि 22 दिसंबर को उसकी सुनवाई होगी। पंजाब के मामले में फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट का रास्ता एक तरह से बंद हो चुका है। सरकार को इसका ध्यान रखना होगा। 
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पूरी दुनिया में सेकुलर कोई नहीं, यह कॉमरेडों का किया धरा : सत्ती
पंचायत चुनाव समय पर नहीं करवाने पर लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के बाद भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि मंत्री जगत सिंह नेगी को धार्मिक भावनाओं पर नहीं बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेकुलर पूरी दुनिया में कोई नहीं है। धर्म निरपेक्ष हो सकते हैं। यह कॉमरेडों का किया धरा है। मंत्री को सीएम सुक्खू ने भी सलाह दी है कि जयराम के साथ बैठो और इनसे कुछ सीखो। सत्ती ने कहा कि अगर नेता के रिश्तेदार कुछ गड़बड़ करते हैं तो गलत नेता को ही कहा जाता है। यहां पर सदन में जितने भी सदस्य हैं, सब जितने ईमानदार और आदर्शवादी हैं, उतने कोई नहीं होंगे। छह-आठ लोग ही खराब होंगे। चुनाव चिह्नन पर पंचायतों के चुनाव नहीं होते हैं। चुनाव समय पर हाेने चाहिए। 
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