फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल उपभोक्ता आयोग का फैसला: खून में अल्कोहल मिलने पर कंपनी क्लेम नहीं कर सकती खारिज, 20 लाख देने का आदेश

Thu, 03 Sep 2026 10:03 AM IST
Ankesh Dogra रुचि सांख्यान, शिमला।

सार

हिमाचल राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा क्लेम से जुड़े अहम मामले में एसबीआई जनरल इंश्योरेंस की अपील खारिज कर दी। आयोग ने कहा कि पैदल व्यक्ति की सड़क हादसे में मौत के मामले में केवल रक्त में शराब मिलने से यह साबित नहीं होता कि दुर्घटना शराब के सेवन के कारण हुई। जिला आयोग के आदेश के अनुसार मृतक की मां को 20 लाख रुपये, ब्याज, मुआवजा और मुकदमा खर्च देना होगा।
Register For Event
विज्ञापन
हिमाचल उपभोक्ता आयोग का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी पैदल व्यक्ति की अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत हो जाती है, तो केवल उसके खून में शराब की पुष्टि होने के आधार पर बीमा कंपनी दुर्घटना क्लेम खारिज नहीं कर सकती। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की पीठ ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें मृतक की मां को 20 लाख रुपये की बीमा राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया था। रामपुर (शिमला) के गांव सनारसा निवासी मनी देवी के बेटे दुशांत गौतम ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस से 20 लाख रुपये की पर्सनल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। 

विज्ञापन

इसकी अवधि 13 फरवरी 2019 से 12 फरवरी 2020 तक थी। एक दिसंबर 2019 को भावानगर (निचार) क्षेत्र में सड़क पर पैदल चलते समय दुशांत को किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। इस संबंध में पुलिस थाना भावानगर (निचार) में एफआईआर भी दर्ज की थी। हादसे के बाद जब मां मनी देवी (नॉमिनी) ने 20 लाख रुपये के क्लेम के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने 8 अक्तूबर 2020 को क्लेम निरस्त कर दिया। कंपनी का तर्क था कि फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट के अनुसार के दुशांत के खून में 299.73 मिलीग्राम अल्कोहल पाया गया था। जिला आयोग ने 13 नवंबर 2024 को फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को आदेश दिया था कि वह शिकायतकर्ता को 20 लाख रुपये की क्लेम राशि, शिकायत दर्ज करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। 

इसके अतिरिक्त 50 हजार रुपये मुआवजा और 25 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के आदेश दिए थे। राज्य उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि दुशांत वाहन नहीं चला रहा था बल्कि वह पैदल चल रहा था और उसे किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मारी थी। केवल रिपोर्ट में अल्कोहल मिलने से यह साबित नहीं होता कि दुर्घटना शराब के सेवन के कारण हुई थी।

चेक बाउंस मामले में आरोपी दोषी करार 
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनु प्रिंजा की अदालत ने नौ साल पुराने चेक बाउंस के मामले में टुटू निवासी आरोपी नानक चंद को दोषी करार दिया है। अदालत ने मामले में सजा की अवधि तय करने के लिए सात सितंबर की तारीख निर्धारित की है। शोघी निवासी शिकायतकर्ता शबीशा देवी ने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। आरोपी और उसकी पत्नी ने शिकायतकर्ता से पांच लाख रुपये की मदद मांगी थी। शिकायतकर्ता ने आरोपी को 2.50 लाख रुपये दिए थे। 2016 में आरोपी ने शिकायतकर्ता को 2.50 लाख रुपये का चेक जारी किया था जो बैंक में लगाने पर बाउंस हो गया था। आरोपी ने बताया कि उसने केवल 50 हजार रुपये लिए थे और चेक सिक्योरिटी के तौर पर दिया था।

दुर्घटना में पिकअप हेल्पर की मौत, परिजनों को मिलेंगे 18.95 लाख  
आनी की अदालत ने पिकअप दुर्घटना में जान गंवाने वाले हेल्पर-सह-कंडक्टर के परिजनों को 18.95 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने बीमा कंपनी को यह मुआवजा देने का आदेश दिया है। आनी उपमंडल के राम कृष्ण की 20 जून 2023 को एक पिकअप वाहन में हेल्पर-सह-कंडक्टर के रूप में काम करते हुए दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। राम कृष्ण की पत्नी और मां ने मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि राम कृष्ण अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। वह जनवरी 2023 से एक व्यक्ति की पिकअप में हेल्पर-सह-कंडक्टर के रूप में काम कर रहे थे। 20 जून 2023 को दूध इकट्ठा करने जाते समय परेषी नाला में वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में राम कृष्ण की मौके पर ही मृत्यु हो गई थी। पिकअप मालिक ने राम कृष्ण को कर्मचारी के रूप में रखने और दुर्घटना होने की बात स्वीकार की।  अदालत ने पाया कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन बीमा कंपनी लिमिटेड से बीमित था। इस पर बीमा कंपनी को मुआवजे के भुगतान के लिए उत्तरदायी ठहराया गया।
विज्ञापन

बिना परमिट वाहन चलाना नियमों का उल्लंघन, अपील की खारिज 
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई वाहन बिना परमिट के सार्वजनिक स्थान पर चलाया जाता है और दुर्घटना का शिकार होता है तो यह मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में बीमा कंपनी क्लेम का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं होगी। चौपाल निवासी शिकायतकर्ता लोकेंदर सिंह ने अपनी गाड़ी का सात लाख रुपये का बीमा एचडीएफसी जनरल इंश्योरेंस से करवाया था। वर्ष 2022 में ब्रानु के पास उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा लेकिन कंपनी ने उनका दावा खारिज कर दिया। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि किसी भी ट्रांसपोर्ट या गुड्स व्हीकल को सार्वजनिक स्थान पर चलाने के लिए संबंधित प्राधिकारी द्वारा जारी वैध परमिट होना अनिवार्य है। कानूनी प्रावधानों की समीक्षा के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता की शिकायत खारिज कर दी। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें