आईजीएमसी की न्यू ओपीडी में सिग्नल की दिक्कत से लोग हो रहे परेशान
बिना भुगतान के नहीं दी जाती पर्ची, 10 रुपये का करना पड़ता है भुगतान
नेटवर्क कम होने से क्यूआर को स्कैन करने के लिए भी लगता है समय
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में पर्ची बनाना किसी जद्दोजहद से कम नहीं है। हालत यह है कि अस्पताल में पर्ची बनवाने के लिए ऑनलाइन भुगतान नहीं हो पा रहा है। इस कारण मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल प्रबंधन ने पर्ची बनाने के लिए हरेक पंजीकरण काउंटर पर भुगतान के लिए क्यूआर कोड लगाए हैं लेकिन ये क्यूआर कोड सिग्नल की दिक्कत से काम नहीं आ पा रहे हैं। इससे मरीजों को पर्ची बनवाना मुश्किल हो रहा है।
नेटवर्क में दिक्कत से कई बार क्यूआर कोड को स्कैन करने में ही काफी समय लग जाता है। वहीं, बिना भुगतान के पर्ची भी नहीं दी जा रही है। कई बार लोगों के पास छुट्टे पैसे न होने पर समस्या खड़ी हो जाती है। इसके बाद मरीजों को छुट्टे पैसे लेने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। अगर छुट्टे पैसे मिल भी जाते हैं तो इसके बाद फिर से मरीजों को पर्ची बनवाने के लिए लाइन में लगना पड़ता है।
गौर रहे कि इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पर्ची बनाने के लिए 10 रुपये लगते हैं। इसके बाद ही मरीजों को पर्ची दी जाती है। शुरुआत में मरीजों को छुट्टे पैसे की दिक्कत आ रही थी। इसे देखते हुए अस्पताल प्रबंधन की ओर से ऑनलाइन भुगतान करने की सुविधा शुरू की लेकिन सुविधा का मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभिन्न कंपनियों का अस्पताल में नेटवर्क काफी स्लो चलता है। नेटवर्क सुविधा को कई बार मरीज दुरुस्त करने की मांग उठा चुके हैं लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
मरीजों के तीमारदार बाबूराम, देवेंद्र, प्रेम कुमार, गौरव, रंजना, प्रवीण ने बताया कि पर्ची बनवाने में घंटों परेशान होना पड़ता है। अस्पताल में नेटवर्क की दिक्कत से पर्ची के लिए ऑनलाइन भुगतान ही नहीं हो पाता है। इससे छुट्टे पैसों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।