शिकायतकर्ता का आरोप है कि 6 फरवरी 2026 को संजीव गांधी ने उसे अपने पास बुलाकर भुगतान से संबंधित वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए। उसे बताया गया कि भुगतान प्रक्रिया पूरी करने के लिए हस्ताक्षर जरूरी हैं और स्वीकृत राशि मिल जाएगी। आरोप है कि हस्ताक्षर करवाने के बावजूद उसे भुगतान नहीं किया गया। जुलाई 2026 में शिकायत करने के बाद कांस्टेबल ने कार्यालय की लेखा शाखा से जानकारी ली। इस दौरान उसे पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन उसके खाते में जमा नहीं हुई।
फंड से 2.35 लाख रुपये की निकासी की जांच
शिमला के एएसपी मेहर पंवार ने बताया कि कांस्टेबल की शिकायत पर तत्कालीन एसएसपी संजीव कुमार गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, वित्तीय रिकॉर्ड की प्रारंभिक जांच में जिला पुलिस के एक फंड से करीब दो वर्षों के दौरान 2.35 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आया। आरोप है कि इस धनराशि का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया, इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, संजीव गांधी का एसएसपी शिमला के पद से कार्मिक विभाग में तबादला होने के बाद फंड की कमी पूरी करने के लिए कांस्टेबल के बिलों की स्वीकृत राशि निकालकर संबंधित फंड खाते में स्थानांतरित किया गया। इससे कांस्टेबल को उसकी स्वीकृत राशि का भुगतान नहीं हो सका।
पुलिस के कुछ अधिकारी मेरे खिलाफ रच रहे हैं साजिश : गांधी
डीआईजी संजीव गांधी ने बताया कि उनके खिलाफ पुलिस के कुछ अधिकारी काफी समय से साजिश रच रहे हैं। उन्होंने पुलिस विभाग में अनियमितताओं और कई गलत कार्यों पर सवाल उठाए हैं। यही वजह है कि उन्हें इस तरह के झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब कांस्टेबल ने पैसों की रिसीविंग दी है तो उसे पैसे भी जारी हुए हैं। उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने प्रदेश पुलिस विभाग की ओर से हुई सीसीटीवी की खरीद के मामले में भी जांच की मांग उठाई थी। ऐसे कई मामले हैं, जिन्हें उन्होंने उजागर किया जिस वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।