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Haryana: अब एमडीआर टीबी की एआई से होगी जांच, विभाग ने शुरू की तैयारियां; करनाल व रोहतक में होगा ट्रायल

Mon, 25 May 2026 10:10 AM IST
शाहिल शर्मा आशीष वर्मा चंडीगढ़

सार

स्टेट टीबी ऑफिसर डॉ. राजेश राजू ने बताया, ट्रायल के दौरान माइक्रोबायोलॉजिस्ट व एआई अपनी-अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसमें दोनों की सटीकता देखी जाएगी।
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टीबी की एआई से होगी जांच - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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हरियाणा में टीबी के खिलाफ लड़ाई अब तकनीक के सहारे और मजबूत होने जा रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से टीबी जांच में तेजी और सटीकता आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (एमडीआर-टीबी) की पहचान भी एआई के जरिए करने की तैयारी में है। करनाल और रोहतक की लैब में इसका जल्द ट्रायल शुरू होगा। विभाग का दावा है कि नई तकनीक से जांच रिपोर्ट कम समय में मिलेगी। ह्यूमन एरर की संभावना खत्म होगी और मरीजों का इलाज समय रहते शुरू कर उन्हें जल्द स्वस्थ किया जा सकेगा।
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एमडीआर-टीबी एक गंभीर रोग है। यह तब होता है, जब टीबी के बैक्टीरिया टीबी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो सबसे प्रभावी मुख्य दवाओं (रिफैम्पिसिन और आइसोनियाजिड) के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। यह स्थिति मुख्य रूप से तब पैदा होती है जब मरीज अपनी टीबी का इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं या डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं को नियमित रूप से नहीं खाते हैं। किसी एमडीआर टीबी के मरीज के सीधे संपर्क में आने से भी यह संक्रमण हो सकता है। अभी इसकी जांच ट्रेंड माइकोबायोजिस्ट करते हैं और जांच रिपोर्ट मैन्युअल तरीके से तैयार की जाती है। इसमें मानवीय त्रुटियों की संभावना ज्यादा रहती है। ऐसे में एआई अब इस समस्या को पूरी तरह से खत्म कर सकता है।

स्टेट टीबी ऑफिसर डॉ. राजेश राजू ने बताया, ट्रायल के दौरान माइक्रोबायोलॉजिस्ट व एआई अपनी-अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसमें दोनों की सटीकता देखी जाएगी। ट्रायल सफल रहा तो एआई माइक्रोबायोलाजिस्ट की मदद करेगा और एआई ही इस रिपोर्ट को निश्चय पोर्टल में अपलोड करेगा। उन्होंने कहा इससे समय पर रिपोर्ट तो मिलेगी साथ ही मरीज का जल्द इलाज शुरू किया जा सकेगा। एमडीआर में यदि जल्दी इलाज शुरू कर दिया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकेगी और संक्रमण पर भी लगाम कसी जा सकेगी।
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हरियाणा में एआई के तीन टूल पहले से चल रही है टीबी की जांच
हरियाणा में टीबी उन्मूलन अभियान को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तीन आधुनिक टूल लागू किए हैं। ये तीनों टूल टीबी की जल्द पहचान, मरीजों की निगरानी और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

1. कफ अगेंस्ट टीबी (सीएटीबी )
यह एक मोबाइल आधारित एआई एप्लीकेशन है, जो मरीज की खांसी की आवाज और अन्य लक्षणों का विश्लेषण कर संभावित टीबी मरीजों की पहचान करता है। इसकी खास बात यह है कि यह इंटरनेट के बिना भी काम कर सकता है। इस टूल से स्वास्थ्य कर्मियों को शुरुआती स्तर पर टीबी संदिग्ध मरीजों को चिन्हित करने में मदद मिल रही है, जिससे समय रहते जांच और इलाज संभव हो पा रहा है।

2. वल्नरेबिलिटी मैपिंग फॉर टीबी (वीएम-टीबी)
यह एआई आधारित जियोस्पेशियल एनालिटिक्स टूल है, जो टीबी मामलों के साथ 20 से अधिक स्वास्थ्य और भौगोलिक संकेतकों का विश्लेषण करता है। इसके जरिए उन गांवों और शहरी क्षेत्रों की पहचान की जाती है, जहां टीबी फैलने का खतरा अधिक है। इस टूल ने हरियाणा में अब तक 2,111 हाई रिस्क गांवों को चिन्हित किया है, जहां स्वास्थ्य विभाग विशेष स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान चला रहा है।

3. प्रेडिक्शन ऑफ एडवर्स टीबी आउटकम्स (पीएटीओ)
यह टूल राष्ट्रीय निक्षय पोर्टल से मरीजों का डेटा लेकर ऐसे मरीजों की पहचान करता है, जिनमें इलाज छोड़ने, गंभीर स्थिति बनने या मृत्यु का खतरा ज्यादा होता है। इससे डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी ऐसे मरीजों पर विशेष निगरानी रख पाते हैं और समय पर इलाज सुनिश्चित कर सकते हैं। इस टूल की मदद से अब तक हरियाणा में 18,591 हाई रिस्क मरीजों की पहचान की जा चुकी है।
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